IND vs SL: श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया की खास तैयारी, नेट बॉलर के रूप में जुड़े चार युवा स्पिनर

IND vs SL: श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया की खास तैयारी, नेट बॉलर के रूप में जुड़े चार युवा स्पिनर

ब्यूरो रिपोर्टर

श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रीलंकाई पिचों पर स्पिन गेंदबाजों की अहम भूमिका को देखते हुए टीम इंडिया के साथ चार युवा स्पिनरों को नेट बॉलर के रूप में जोड़ा गया है। इन गेंदबाजों के जरिए भारतीय बल्लेबाजों को अलग-अलग तरह की स्पिन का अभ्यास कराया जा रहा है।

नेट बॉलर के रूप में टीम के साथ जुड़े खिलाड़ियों में विपराज निगम, शिवांग कुमार, हर्ष दुबे और तनुष कोटियन शामिल हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि श्रीलंका की परिस्थितियां स्पिन गेंदबाजों के अनुकूल रहती हैं, इसलिए बल्लेबाजों को हर तरह की स्पिन चुनौती के लिए तैयार करना जरूरी है।

चारों नेट गेंदबाज अलग-अलग शैली की स्पिन गेंदबाजी करते हैं। हर्ष दुबे लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर हैं, जबकि तनुष कोटियन ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। वहीं विपराज निगम लेग स्पिनर और शिवांग कुमार लेफ्ट आर्म रिस्ट स्पिनर हैं। इनकी विविधता से भारतीय बल्लेबाजों को मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास का मौका मिलेगा।

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, टीम मैनेजमेंट श्रीलंका की स्पिन अनुकूल पिचों को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति अपना रहा है। उद्देश्य यह है कि बल्लेबाज टेस्ट मुकाबलों से पहले हर प्रकार की स्पिन गेंदबाजी का सामना कर अपनी तकनीक और रणनीति को मजबूत कर सकें।

श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे, जबकि केएल राहुल उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे। टीम में यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा सहित कई खिलाड़ियों को जगह दी गई है।

भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 से 19 अगस्त तक गॉल में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा और अंतिम टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होंगे।

श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम का फोकस स्पिन के खिलाफ मजबूत तैयारी पर है। चार अलग-अलग शैली के स्पिनरों को नेट अभ्यास के लिए शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि बल्लेबाज चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।