ई-फाइलिंग व्यवस्था को लेकर सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उठाया सवाल, उत्तराखंड में 1.17 लाख से अधिक मामले ऑनलाइन दर्ज

ई-फाइलिंग व्यवस्था को लेकर सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उठाया सवाल, उत्तराखंड में 1.17 लाख से अधिक मामले ऑनलाइन दर्ज

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : संजय जोशी

नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से भारतीय न्यायालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और ई-फाइलिंग व्यवस्था की वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से जानकारी मांगी।

सांसद अजय भट्ट ने कानून एवं न्याय मंत्री से पूछा कि क्या देश के न्यायालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को शामिल किया गया है। उन्होंने उत्तराखंड सहित देश के सभी न्यायालयों में ई-फाइलिंग व्यवस्था की स्थिति, ऑनलाइन दर्ज मामलों की संख्या और इस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी।

केंद्र सरकार ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत देशभर की न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इसके अंतर्गत केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस), ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल केस रिकॉर्ड, राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), ई-सेवा केंद्र, ई-पेमेंट और मोबाइल एप जैसी डिजिटल सुविधाएं लागू की गई हैं।

कानून एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश के 25 उच्च न्यायालयों में ई-फाइलिंग सुविधा उपलब्ध है। इस अवधि तक देशभर में ई-फाइलिंग के माध्यम से कुल 1 करोड़ 25 लाख 87 हजार 329 मामलों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा चुका है।

उत्तराखंड की स्थिति को लेकर मंत्रालय ने बताया कि राज्य के जिला न्यायालयों और उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अब तक कुल 1,17,924 मामलों की ई-फाइलिंग की गई है। इनमें उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 356 मामले और जिला न्यायालयों में 1,17,568 मामले ऑनलाइन दर्ज किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि ई-फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्यशालाएं, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), वीडियो गाइड और ई-सेवा केंद्रों के माध्यम से लोगों को डिजिटल न्यायिक सेवाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सांसद अजय भट्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का उपयोग समय की मांग है। ई-फाइलिंग से न्याय प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा सकता है, जिससे आम लोगों को न्यायालयों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।