

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

बद्रीनाथ मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले में हुई गिरफ्तारियों के बाद उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। मामले को लेकर कांग्रेस और बद्री-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार से जांच के आधार पर मंदिर समिति अध्यक्ष की भूमिका की भी जांच कराने और उन्हें पद से हटाने की मांग की है।


कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मंदिर समिति के अध्यक्ष की भूमिका की भी जांच कराने और आवश्यक होने पर उन्हें पद से हटाने की मांग की।



वहीं बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बद्री-केदार मंदिर समिति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और समिति इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है।

हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में तीन स्तर पर जांच चल रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समिति का स्पष्ट उद्देश्य है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि गोदियाल के कार्यकाल में विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग, करीबियों को लाभ पहुंचाने और करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में सीसीटीवी कैमरे हटवाए गए और नियत अवधि से अधिक समय तक अध्यक्ष पद पर बने रहे।

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मंदिर समिति के एक भी रुपये का निजी उपयोग नहीं किया। उनका कहना था कि जैसे ही चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया, समिति ने तत्काल कार्रवाई की, जो पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच के अधीन है। मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

