

स्थान : (चकराता) देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की तीनों तहसीलों में राजस्व कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार से सरकारी कामकाज प्रभावित हो गया है। पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ के आह्वान पर कालसी, चकराता और त्यूनी तहसीलों के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से लगातार अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।


राजस्व कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों से पत्राचार कर रहे हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाना पड़ा है।




संघ के पदाधिकारियों के अनुसार कालसी, चकराता और त्यूनी तहसीलों में तैनात राजस्व कर्मचारियों और अनुसेवकों के स्थायीकरण की मांग लंबे समय से लंबित है। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक अनिल कुकरेती के स्थायीकरण का मामला भी अब तक हल नहीं हो पाया है। कर्मचारियों ने इन मामलों में तत्काल निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि विभागीय प्रक्रियाओं में देरी से कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।



आंदोलनरत कर्मचारियों ने एसीपी से संबंधित पत्रावलियों पर त्वरित कार्रवाई करने और वर्ष 2025-26 की गोपनीय प्रविष्टियों का सत्यापन कराने की भी मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि इन प्रक्रियाओं के समय पर पूरा नहीं होने से उनके सेवा संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लंबित पत्रावलियों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की है।


इसके अलावा कर्मचारियों ने रोके गए वेतन का तत्काल भुगतान करने और रजिस्ट्रार कानूनगो के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियां करने की मांग की है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का दबाव पड़ रहा है। ऐसे में विभाग को रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
राजस्व कर्मचारियों ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान मिलने वाले भत्तों का भुगतान न होने पर भी नाराजगी जताई है। इसके साथ ही फार्मर रजिस्ट्री कैंप के आयोजन से संबंधित लंबित धनराशि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय कार्यों का निर्वहन करने के बावजूद उन्हें समय पर निर्धारित भुगतान और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।



कालसी, चकराता और त्यूनी तहसीलों में राजस्व कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का असर विभिन्न राजस्व संबंधी कार्यों पर पड़ रहा है। इन तहसीलों में दूरदराज के पर्वतीय गांवों से लोग अपने जरूरी कामकाज के लिए पहुंचते हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते भूमि संबंधी कार्यों, राजस्व अभिलेखों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में परेशानियां बढ़ने की आशंका है। आंदोलन लंबा खिंचने पर आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का व्यावहारिक समाधान नहीं किया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।
वहीं इस मामले में तहसील प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित तहसीलदार की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। एसडीएम भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले, जिसके कारण प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट पक्ष सामने नहीं आ सका। फिलहाल जौनसार बावर की तीनों तहसीलों में राजस्व कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी है। अब देखना होगा कि प्रशासन कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और तहसीलों में सामान्य कामकाज कब तक बहाल हो पाता है।

