अंकिता भंडारी के माता-पिता को राजघाट से हटाने पर गरमाई सियासत, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

अंकिता भंडारी के माता-पिता को राजघाट से हटाने पर गरमाई सियासत, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के राजघाट पर धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने कहा कि माता-पिता की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की थी।

दरअसल, अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को दिल्ली के राजघाट पहुंचे थे। परिवार की मांग है कि हत्याकांड की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। साथ ही मामले में सामने आए कथित वीआईपी एंगल की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि घटना से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिल सके।

राजघाट पर धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को वहां से हटा दिया। इस कार्रवाई के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें बुराड़ी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। पुलिस की कार्रवाई और इसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता को जबरन हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें करीब दो घंटे तक वाहन में बैठाकर सड़कों पर घुमाती रही। गोदियाल ने इस व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि न्याय की मांग कर रहे माता-पिता को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया।

गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता के माता-पिता लंबे समय से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान अंकिता की मां की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने घटना की निंदा करते हुए माता-पिता को तत्काल रिहा करने की मांग उठाई।

वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पूरे मामले पर अलग प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार अंकिता के माता-पिता का स्वास्थ्य बिगड़ रहा था। इसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। महेंद्र भट्ट ने कहा कि इस कार्रवाई को किसी दूसरे नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बाद मामले को लेकर दोनों राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख सामने आए हैं। कांग्रेस जहां पुलिस की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा की ओर से इसे स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बीच दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजघाट धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने के लिए कहा गया था।

अंकिता भंडारी हत्याकांड वर्ष 2022 से उत्तराखंड के प्रमुख चर्चित मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में वनंत्रा रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। हालांकि अंकिता के परिजन कथित वीआईपी एंगल सहित कुछ अन्य पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाते रहे हैं। परिवार का कहना है कि मामले की सभी परिस्थितियों की जांच होना आवश्यक है।

फिलहाल राजघाट की घटना के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस और भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों के बयानों से इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। वहीं अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और कथित वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। अब पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों और परिवार की जांच संबंधी मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।