सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर बाबा रामदेव ने जताई नाराजगी, बोले—धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर हो

सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर बाबा रामदेव ने जताई नाराजगी, बोले—धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर हो

ब्यूरो रिपोर्ट
स्थान : हरिद्वार

कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान योग गुरु स्वामी रामदेव महाराज ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर कथित तौर पर की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं, परंपराओं और आराध्य देवी-देवताओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करना उचित नहीं है। धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या उनके वास्तविक संदर्भों, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा धर्मशास्त्रों और पुराणों के संदर्भों को बदलकर ऐसी बातें प्रचारित की जा रही हैं, जिनसे सनातन धर्म की आस्थाओं और देवी-देवताओं की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन आवश्यक है। बिना प्रमाण और संदर्भ के किसी भी धार्मिक विषय की व्याख्या करने से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

बाबा रामदेव ने विशेष रूप से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता सीता को लेकर की जा रही कुछ व्याख्याओं पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार तथा मदिरापान से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने जैसे दावों की प्रमाणिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों को उनके मूल संदर्भ में समझना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर किया जा सके।

स्वामी रामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को लेकर की जा रही कुछ व्याख्याओं का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक प्रसंगों को विकृत रूप में प्रस्तुत करना सनातन परंपरा के मूल भाव के विपरीत है। धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को समझने के लिए उनके दार्शनिक महत्व तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का अध्ययन किया जाना चाहिए।

योग गुरु बाबा रामदेव ने महायोगी भगवान शिव को नशे से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भगवान शिव भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में योग, तपस्या और साधना के प्रतीक माने जाते हैं। उनके स्वरूप और धार्मिक महत्व की व्याख्या करते समय आध्यात्मिक संदर्भों को ध्यान में रखना आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक प्रतीकों के संबंध में तथ्यहीन और भ्रामक धारणाओं के प्रचार का विरोध किया।

बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर स्वस्थ और तथ्यपरक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रंथों, वेदों, पुराणों और धर्मशास्त्रों के अध्ययन पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी दावे को स्वीकार करने से पहले उसके मूल स्रोत और प्रमाणों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन परंपराओं के संबंध में उठाए जा रहे सवालों का जवाब तथ्यों, शास्त्रीय संदर्भों और प्रमाणों के माध्यम से दिया जाएगा।

इस दौरान स्वामी रामदेव ने जानकारी दी कि पतंजलि की ओर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन का तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अधिवेशन में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, धार्मिक ग्रंथों और सनातन धर्म से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या को लेकर किए जा रहे विभिन्न दावों की प्रमाणिकता और उनके वास्तविक संदर्भों को सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।

प्रेस वार्ता के अंत में बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को समझने तथा संरक्षित रखने के लिए प्रमाणिक ज्ञान का प्रसार जरूरी है। उन्होंने धार्मिक विषयों पर फैलने वाली भ्रामक जानकारियों के प्रति जागरूक रहने और मूल ग्रंथों के अध्ययन को महत्व देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 104वां अधिवेशन प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और धार्मिक विषयों पर तथ्यपरक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।