
स्थान : हरिद्वार
रिपोर्ट: धर्मराज

धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म के देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और प्राचीन ग्रंथों से जुड़े विषयों पर चर्चा तथ्यों, प्रमाणों और उनके वास्तविक संदर्भों के आधार पर होनी चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं को लेकर किए जाने वाले दावों की वास्तविकता सामने लाने के लिए भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।

प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों के संबंध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पहले उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भों को समझना आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक विषयों पर गंभीर और तथ्यपरक चर्चा की आवश्यकता जताते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान किया जाना चाहिए।




बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों और विचारों को उनके वास्तविक संदर्भों से अलग करके प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों से जुड़े विषयों पर यदि कोई सवाल उठता है, तो उसका समाधान प्रमाणों और विद्वत्तापूर्ण विमर्श के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से संबंधित विषयों को समझने के लिए प्राचीन साहित्य और उपलब्ध प्रमाणों का गंभीरता से अध्ययन आवश्यक है।

योग गुरु बाबा रामदेव ने जानकारी दी कि पतंजलि की ओर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन का तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। इस अधिवेशन में भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और सनातन संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिवेशन के माध्यम से धार्मिक ग्रंथों और देवी-देवताओं को लेकर किए जा रहे विभिन्न दावों की तथ्यात्मक समीक्षा करने तथा उनकी वास्तविकता सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।



बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का अधिवेशन प्राचीन भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक साहित्य और परंपराओं के संबंध में समाज के सामने सही जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। अधिवेशन में विभिन्न विषयों पर चर्चा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को सामने रखने और उससे जुड़े सवालों पर प्रमाण आधारित संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने शिक्षा के क्षेत्र में पतंजलि की नई पहल की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि आईएएस और पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए पतंजलि की ओर से एक विशेष ऐप तैयार किया जा रहा है। इस ऐप के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं को अध्ययन संबंधी संसाधन उपलब्ध कराना है।



बाबा रामदेव ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए पतंजलि की ओर से ऐप के माध्यम से शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल से आईएएस और पीसीएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सहायता मिलेगी। हालांकि ऐप के शुभारंभ की तिथि और उसमें उपलब्ध कराई जाने वाली सभी सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

प्रेस वार्ता के अंत में बाबा रामदेव ने एक बार फिर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों को लेकर तथ्यात्मक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय उनके वास्तविक संदर्भों और प्रमाणों का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के तीन दिवसीय अधिवेशन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें विभिन्न दावों और धार्मिक विषयों पर विस्तार से विमर्श किया जाएगा। वहीं, पतंजलि की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए ऐप विकसित करने की पहल भी शिक्षा के क्षेत्र में एक नई योजना के रूप में सामने आई है।

