बद्रीनाथ धाम में कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था, माइनस में पहुंचा तापमान, दर्शन के लिए उमड़ रहे तीर्थयात्री

बद्रीनाथ धाम में कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था, माइनस में पहुंचा तापमान, दर्शन के लिए उमड़ रहे तीर्थयात्री

स्थान : बद्रीनाथ धाम
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चारधामों के कपाट बंद होने की तिथियां नजदीक आने के साथ ही तीर्थयात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिल रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम होने का नाम नहीं ले रही है। भू-बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम में सुबह और शाम हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है, जबकि रात के समय तापमान शून्य से नीचे पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। इसके बावजूद भगवान बद्री विशाल के दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों का पहुंचना लगातार जारी है।

चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही बद्रीनाथ धाम में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक और शाम को सूर्यास्त के बाद ठंड का असर अधिक महसूस किया जा रहा है। धाम में चल रही बर्फीली हवाओं के कारण ठिठुरन बढ़ गई है। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए उत्साह के साथ धाम पहुंच रहे हैं।

बद्रीनाथ धाम में कड़ाके की ठंड के बीच श्रद्धालुओं की आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है। शाम के समय तापमान में गिरावट और सर्द हवाओं के बावजूद बड़ी संख्या में तीर्थयात्री भगवान श्री हरि नारायण की शयन आरती में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर के आसपास मौजूद रहते हैं। आलम यह है कि देर शाम तक मंदिर के सिंहद्वार पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है। श्रद्धालु ठंड और ठिठुरन की परवाह किए बिना भगवान बद्री विशाल के दर्शन और आरती का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

धाम में बढ़ती ठंड का असर स्थानीय व्यापारियों, होटल कारोबारियों और साधु-संतों पर भी पड़ रहा है। सर्दी से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। बदरीनाथ धाम के विभिन्न तिराहों, चौराहों, बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड और मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में लोग आग जलाकर खुद को गर्म रखने का प्रयास कर रहे हैं। सुबह और शाम के समय अलाव के आसपास लोगों की भीड़ देखी जा रही है।

बद्रीनाथ धाम में रात के समय तापमान माइनस में पहुंचने से ठंड का प्रकोप और अधिक बढ़ गया है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सर्द हवाओं के कारण लोगों को भारी ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों को भी ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं। वहीं साधु-संत और महात्मा भी अलाव के सहारे ठंड से राहत पाने का प्रयास कर रहे हैं।

चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने में अब करीब 19 दिनों का समय शेष बताया जा रहा है। ऐसे में कपाट बंद होने से पहले भगवान बदरी विशाल के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। लगातार बढ़ती ठंड के बावजूद तीर्थयात्री धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना और दर्शन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की मौजूदगी से धाम में धार्मिक गतिविधियां और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

बद्रीनाथ धाम के साथ ही अन्य चारधाम और तीनों केदारों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी शीतलहर का असर बढ़ने लगा है। सुबह और शाम तापमान में गिरावट के कारण ठंड अधिक महसूस की जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में बदलते मौसम और बढ़ती सर्दी के बीच तीर्थयात्रियों को गर्म कपड़ों और ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजामों के साथ यात्रा करने की आवश्यकता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और दर्शन को लेकर उत्साह बरकरार है।

फिलहाल भू-बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर स्थानीय लोग, व्यापारी और साधु-संत अलाव के सहारे सर्दी का सामना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शन और शयन आरती में शामिल होने के लिए देर शाम तक मंदिर परिसर में डटे नजर आ रहे हैं। कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के बावजूद तीर्थयात्रियों का उत्साह यह दर्शा रहा है कि बदरीनाथ धाम में ठंड और ठिठुरन पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ रही है।