
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड विधानसभा सत्र से पहले खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। किसानों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों पर विपक्ष का समर्थन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए उमेश कुमार ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने की बात कही है। उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दोनों दलों ने इस मुद्दे पर एक-दूसरे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

खानपुर विधायक उमेश कुमार ने कहा कि वह लंबे समय से किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन उन्हें विपक्ष का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 की आपदा के दौरान किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के मुद्दे पर विपक्ष ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर विपक्ष का रवैया निराशाजनक रहा है।




उमेश कुमार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और कर्ज वसूली का मुद्दा उठाते हुए भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गन्ना भुगतान अटकने और किसानों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट यानी आरसी जारी होने जैसी समस्याओं के बावजूद विपक्ष ने सदन में उनके साथ खड़े होने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर उन्हें राजनीतिक दलों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी उपेक्षा के चलते उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।


हालांकि उमेश कुमार ने अपने बयान में भाजपा और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाए रखने की बात कही है, लेकिन उनके इस्तीफे के ऐलान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा सत्र से ठीक पहले सामने आए इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उमेश कुमार के आरोपों के बाद भाजपा ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस ने विधायक की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।


भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर ने उमेश कुमार के बयान को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि खानपुर विधायक के बयान से स्पष्ट होता है कि विपक्ष अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहा है। नवीन ठाकुर ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक स्वार्थ साधने और हंगामा करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार सभी विधायकों को उनके क्षेत्रों के विकास और जनहित के कार्यों में लगातार सहयोग देती रही है।

वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने भाजपा और उमेश कुमार दोनों पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खानपुर विधायक सत्ता के दबाव में काम कर रहे हैं और भाजपा की बी-टीम की भूमिका निभा रहे हैं। प्रतिमा सिंह ने सवाल उठाया कि पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान उमेश कुमार ने विधानसभा में किसानों और आम जनता से जुड़े कितने मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष पर आरोप लगाने से जनता के प्रति जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता।



कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस नेता काजी निजामुद्दीन सहित पार्टी के अन्य विधायक लगातार किसानों, बेरोजगारों और आम जनता के मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठाते रहे हैं। उन्होंने उमेश कुमार पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए बयानबाजी करने का आरोप लगाया। प्रतिमा सिंह ने कहा कि कांग्रेस जनता की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है और आगे भी किसानों तथा बेरोजगार युवाओं की आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने उमेश कुमार के आरोपों को निराधार बताते हुए उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए।

फिलहाल खानपुर विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान ने विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। भाजपा जहां उनके बयान को विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रही है। हालांकि उमेश कुमार की ओर से अभी इस्तीफा सौंपे जाने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वह अपने इस्तीफे के ऐलान पर कायम रहते हैं या आने वाले दिनों में कोई नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।

