
स्थान : अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर अल्मोड़ा के बाजारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सुहागिन महिलाएं करवा चौथ की तैयारियों में जुटी हुई हैं। इस बार बाजारों में उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला ऐपण से सजे पूजा के सामान की विशेष मांग बनी हुई है।

करवा चौथ के नजदीक आते ही अल्मोड़ा के बाजारों में त्योहार की रौनक बढ़ गई है। महिलाएं पूजा की थालियां, छलनी, कलश, दीये और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी कर रही हैं। बाजारों में सजी रंग-बिरंगी दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ रही है। खास बात यह है कि इस बार पारंपरिक ऐपण कला से तैयार उत्पाद महिलाओं को खूब आकर्षित कर रहे हैं।




उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली ऐपण कला का प्रभाव इस बार करवा चौथ के बाजारों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ऐपण डिजाइन से सजी सुहाग थालियां, छलनी, लोटे, दीये और कलश महिलाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। इन उत्पादों पर उकेरी गई पारंपरिक आकृतियां पर्व की धार्मिक आस्था के साथ पहाड़ की लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी प्रस्तुत कर रही हैं।


स्थानीय व्यापारी सक्षम अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष करवा चौथ पर ऐपण कला से सजे उत्पादों का चलन काफी बढ़ा है। महिलाएं सामान्य पूजा सामग्री के मुकाबले ऐपण डिजाइन वाले सामान को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए व्यापारियों ने भी इस बार विशेष रूप से ऐपण कला से सजी पूजा सामग्री बाजार में उपलब्ध कराई है।


व्यापारी सक्षम अग्रवाल के अनुसार, करवा चौथ के लिए छलनी, लोटे, स्टील की देग, पराली और अन्य आवश्यक सामान ऐपण डिजाइन में तैयार करवाए गए हैं। इनकी बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि स्थानीय संस्कृति से जुड़े उत्पादों को ग्राहकों का सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। इससे व्यापारियों में भी उत्साह है और पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिल रहा है।

ऐपण कला से तैयार उत्पादों की बढ़ती मांग स्थानीय महिलाओं और कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। त्योहारों के अवसर पर इन उत्पादों की बिक्री बढ़ने से हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। विशेष रूप से घरों में रहकर ऐपण कला से जुड़े उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को अपनी कला के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।



स्थानीय संस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि पारंपरिक त्योहारों में ऐपण कला का बढ़ता उपयोग उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में सकारात्मक पहल है। आधुनिक दौर में लोक कलाओं से सजे उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिल रहा है।


करवा चौथ को लेकर अल्मोड़ा में इस बार धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति और स्वरोजगार का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए पर्व की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर ऐपण कला से सजे उत्पाद बाजारों की रौनक बढ़ा रहे हैं। इन उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता पहाड़ की पारंपरिक लोक कला को नई पहचान देने के साथ स्थानीय कलाकारों और महिलाओं की आजीविका को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

