
स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी पर्व कल देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। रुड़की में भी दशहरा उत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर के नेहरू स्टेडियम में शाम को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का दहन किया जाएगा। खास बात यह है कि इन पुतलों को उत्तर प्रदेश के पुरकाजी से आए मुस्लिम समुदाय के कारीगर तैयार कर रहे हैं, जो पिछले करीब एक महीने से दिन-रात मेहनत में जुटे हैं।

रुड़की के दशहरा उत्सव के लिए 70 फीट ऊंचा रावण, 55 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 45 फीट ऊंचा मेघनाद का पुतला तैयार किया जा रहा है। कारीगर इन विशालकाय पुतलों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। आयोजकों की तैयारी है कि मंगलवार सुबह तक सभी पुतले पूरी तरह तैयार हो जाएं, ताकि शाम को दशहरा उत्सव के दौरान उनका दहन किया जा सके।




इन पुतलों को तैयार करने वाले कारीगरों की मेहनत इस आयोजन को सामाजिक सौहार्द की एक खास तस्वीर भी देती है। उत्तर प्रदेश के पुरकाजी से आई मुस्लिम कारीगरों की टीम अपने हुनर के जरिए दशहरा उत्सव को भव्य बनाने में योगदान दे रही है। उनकी कला और मेहनत इस बात का उदाहरण है कि परंपराएं और सांस्कृतिक आयोजन आपसी सहयोग से आगे बढ़ते हैं।


कारीगर तनवीर ने बताया कि वह पिछले करीब एक महीने से पुतले बनाने के काम में लगे हुए हैं। उनके साथ अन्य कारीगर भी इस काम को पूरा करने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पिछले 20 से 25 वर्षों से पुतले बनाने का काम करता आ रहा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह कला आज भी उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है।



हालांकि, कारीगरों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी हैं। तनवीर के मुताबिक, समय के साथ पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन मेहनताने में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में दिन-रात मेहनत करने के बावजूद मिलने वाली रकम से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।

इसके बावजूद कारीगर अपनी पारिवारिक परंपरा और रोजी-रोटी से जुड़े इस काम को जारी रखे हुए हैं। पुतलों को आकार देने से लेकर उनकी सजावट और अंतिम तैयारी तक, हर चरण में विशेष मेहनत और कौशल की जरूरत होती है। दशहरा उत्सव से पहले इन कारीगरों की व्यस्तता बढ़ गई है, ताकि निर्धारित समय पर काम पूरा किया जा सके।




रुड़की के नेहरू स्टेडियम में तैयार हो रहे ये विशालकाय पुतले विजयदशमी के उत्सव को भव्यता देने के साथ सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश भी दे रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के कारीगरों द्वारा हिंदू पर्व के लिए पुतले तैयार करना साझा सांस्कृतिक परंपराओं और पारस्परिक सहयोग की एक मिसाल है।

अब शहरवासियों को दशहरा उत्सव का इंतजार है, जहां शाम को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। इस आयोजन की भव्यता के पीछे उन कारीगरों की मेहनत भी है, जिनका हुनर उत्सव को खास बनाता है, लेकिन जिनकी बढ़ती लागत और मेहनताने से जुड़ी चिंताएं भी ध्यान दिए जाने की मांग करती हैं।

