
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग एक बार फिर तेज होने जा रही है। इस मुद्दे को लेकर कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन पहले भी आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन अब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल पाया है। इसी मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी ने 18 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। संगठन हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में धरना-प्रदर्शन के साथ आंदोलन की शुरुआत करेगा।

पहाड़ी आर्मी ने प्रेस वार्ता कर अपनी आगामी रणनीति की जानकारी दी। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही स्थायी राजधानी का मुद्दा लगातार उठता रहा है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हो पाया है। संगठन ने सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग की है।




प्रेस वार्ता में पूर्व आईएएस अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के अपर सचिव रहे विनोद रतूड़ी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन की समस्या लगातार बनी हुई है। शिक्षा, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि देहरादून में बैठकर अधिकारी और नेता पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को पूरी तरह महसूस नहीं कर पाते।


विनोद रतूड़ी ने कहा कि यदि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाता है, तो मंत्रियों और अधिकारियों को वहां बैठकर काम करना होगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं को करीब से समझने और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।


पहाड़ी आर्मी ने ऐलान किया है कि 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के जरिए आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके बाद मांग पूरी नहीं होने पर भूख हड़ताल की जाएगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।

संगठन के अनुसार, स्थायी राजधानी का मुद्दा केवल राजधानी तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से भी है। पहाड़ी आर्मी का कहना है कि राजधानी गैरसैंण होने से सरकार का ध्यान पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं की ओर अधिक केंद्रित हो सकेगा।



अब सभी की नजरें 18 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस आंदोलन पर टिकी हैं। देखना होगा कि पहाड़ी आर्मी की इस पहल पर सरकार क्या रुख अपनाती है और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

