
स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की योगनगरी ऋषिकेश में गंगा के पावन तट पर इन दिनों आस्था, अध्यात्म और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। परमार्थ निकेतन में आयोजित ‘शबरी रामलीला’ देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आए आदिवासी कलाकार अपनी पारंपरिक शैली में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

नवरात्रि और शरद पर्व के अवसर पर देशभर में रामलीलाओं का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में प्रस्तुत की जा रही शबरी रामलीला अपनी अनूठी शैली के चलते खास पहचान बना रही है। गंगा की कलकल धारा के बीच सजे मंच पर आदिवासी संस्कृति और रामकथा का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ रहा है।



छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों से आए कलाकार अपनी लोकशैली, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और विशिष्ट वेशभूषा के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर रहे हैं। उनकी प्रस्तुतियों में आदिवासी लोक संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। इस अनूठे मंचन को देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानी भी उत्साहपूर्वक शामिल हो रहे हैं।


परमार्थ निकेतन का गंगा तट इन दिनों रामभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। रामलीला के माध्यम से दर्शकों को न केवल भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित होने का अवसर मिल रहा है, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जानने का मौका भी मिल रहा है। विदेशी पर्यटक भी रामकथा की इस पारंपरिक प्रस्तुति में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।


परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि का कहना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, आदर्शों और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण जरिया है।

उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम की कथा आदिवासी लोकशैली में प्रस्तुत की जाती है, तो देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एकता का संदेश और मजबूत होता है। यह आयोजन वसुधैव कुटुंबकम की भावना को भी आगे बढ़ाता है, जिसमें समूची दुनिया को एक परिवार मानने का विचार निहित है।



गंगा तट पर आयोजित शबरी रामलीला अध्यात्म, कला और लोक संस्कृति के सुंदर संगम के रूप में सामने आ रही है। यह आयोजन ऋषिकेश पहुंचने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को भारतीय संस्कृति के विविध रंगों से रूबरू कराने के साथ ही लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन का संदेश भी दे रहा है।

