
स्थान : विकासनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

नवरात्रि के पावन पर्व पर विकासनगर में कन्या पूजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति और नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दिया गया। जीतगढ़ स्थित मां बाला सुंदरी मंदिर में 121 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड वन पंचायत सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कुलदीप कुमार ने विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2100 कन्याओं के पूजन का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम के दौरान कुलदीप कुमार ने मां भगवती की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद कन्याओं को तिलक लगाकर और चुनरी ओढ़ाकर उनका पूजन किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार कन्याओं को भोजन कराया गया तथा उपहार भेंट किए गए।



कन्या पूजन के दौरान बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्हें पठन-पाठन सामग्री भी वितरित की गई। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने मां भगवती की आराधना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।


पूर्व विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि कन्या पूजन हमारी धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नवरात्रि में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। यह परंपरा समाज को बेटियों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा देती है।


उन्होंने बताया कि विकासनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में 2100 कन्याओं के पूजन का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में जीतगढ़ स्थित मां बाला सुंदरी मंदिर में 121 कन्याओं का पूजन किया गया। इससे पहले तेलपुर, मेहूंवाला और अन्य क्षेत्रों में भी कन्या पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

कुलदीप कुमार ने कहा कि बेटियों का सम्मान केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुरक्षा, शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी आवश्यक है।



कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने कन्या पूजन में भाग लेकर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया और बेटियों के सम्मान तथा सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और समाज में बेटियों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया। आयोजकों ने भविष्य में भी इस तरह के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को जारी रखने की बात कही।

