
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में मानदेय और स्टाइपेंड को लेकर चल रहा आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। पैरामेडिकल छात्रों के आंदोलन के बीच शनिवार को नर्सिंग स्टाफ ने भी मानदेय की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन में शामिल होने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

पैरामेडिकल छात्र पिछले चार दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से सेवाएं देने के बावजूद उनकी मानदेय संबंधी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी मांग को लेकर पैरामेडिकल छात्रों ने कामकाज का बहिष्कार कर आंदोलन शुरू किया है।


शनिवार शाम नर्सिंग स्टाफ भी आंदोलन के समर्थन में उतर आया। बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ ने मेडिकल कॉलेज परिसर से जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की और मानदेय दिए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।


आंदोलन कर रहे नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि वर्ष 2022 के बाद से उन्हें मानदेय नहीं मिला है। उनका दावा है कि वे लगातार दिन-रात अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद लंबे समय से उनकी आर्थिक मांग लंबित है। कर्मचारियों ने इसे उनके साथ भेदभाव बताते हुए जल्द समाधान की मांग की।



प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हाल ही में सरकार ने एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड को 17 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर न्यूनतम 25 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। ऐसे में नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों की मांगों पर भी सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

नर्सिंग स्टाफ ने आरोप लगाया कि उनसे अस्पताल में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम लिया जाता है, लेकिन मानदेय के मामले में उनकी लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों ने कहा कि कई बार अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखने के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।



आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार जैसा कदम भी उठाया जा सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और शासन की होगी।

एसटीएच में बीते दिनों डॉक्टरों के स्टाइपेंड आंदोलन के कारण भी ओपीडी और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं। अब पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन से एक बार फिर अस्पताल आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने सरकार तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग से उनकी मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समय रहते समाधान जरूरी है। अब सभी की नजर शासन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

