
स्थान : काशीपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी में फीस को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कुछ बच्चों को फीस जमा नहीं होने के कारण परीक्षा से रोके जाने के आरोपों के बाद अब छात्र संघ और भारतीय किसान यूनियन भी मामले में मुखर हो गए हैं। दोनों संगठनों ने विद्यार्थियों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करने की चेतावनी दी है।

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि फीस जमा नहीं होने के कारण उनके बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोका गया। मामला सामने आने के बाद किसान नेता स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के सामने विरोध दर्ज कराया। वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी अपने स्तर से आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है।



विवाद बढ़ने के बाद मामला आईटीआई कोतवाली तक पहुंच गया है। स्कूल प्रबंधन की ओर से किसान नेता जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू के संबंध में शिकायत दी गई, जबकि बाद में स्कूल चेयरमैन को कथित धमकी मिलने के मामले में भी मुकदमा दर्ज कराया गया। दूसरी ओर जितेंद्र सिंह ने भी पुलिस को तहरीर देकर धमकी वाली कॉल से किसी तरह का संबंध होने से इनकार करते हुए निष्पक्ष और तकनीकी जांच की मांग की।


भारतीय किसान यूनियन ने आरोप लगाया कि फीस से जुड़े मामले में बच्चों के अधिकारों की आवाज उठाने के कारण उनके पदाधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही बच्चों को परीक्षा से रोकने के आरोपों की भी जांच करने की मांग की है।



इधर छात्र संघ भी विद्यार्थियों और अभिभावकों के समर्थन में सामने आया है। छात्र नेताओं ने खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्कूल में फीस और परीक्षा से जुड़े पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस पूरे विवाद के बीच शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह साहू ने कहा है कि फीस के अभाव में किसी विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि अभिभावकों की ओर से लिखित शिकायत मिलने के बाद विभाग आवश्यक कार्रवाई करेगा।




छात्र संगठनों का सवाल है कि यदि मामला सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है तो शिक्षा विभाग स्वयं स्कूल की जांच क्यों नहीं कर रहा। उनका कहना है कि निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली, फीस व्यवस्था और विद्यार्थियों के अधिकारों की निगरानी करना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
वहीं स्कूल पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए हैं जिनकी फीस जमा नहीं हुई है। ऐसे में अब जांच का केंद्र यह भी होगा कि संबंधित बच्चों को परीक्षा से रोकने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और स्कूल प्रबंधन ने फीस के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन किया या नहीं।

फिलहाल मामला शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों के स्तर पर पहुंच चुका है। छात्र संघ और भारतीय किसान यूनियन ने निष्पक्ष जांच और विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा की मांग की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिक्षा विभाग पूरे विवाद की जांच कितनी जल्द पूरी करता है और आरोप सही पाए जाने की स्थिति में संबंधित पक्ष के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

