
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

एमबीपीजी कॉलेज में 29 सितंबर को प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव से ठीक पहले महिला आरक्षण लागू किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने छात्रसंघ के 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत छात्रा उपाध्यक्ष के साथ संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद भी छात्राओं के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।

विश्वविद्यालय का निर्णय सामने आते ही संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे छात्रों ने शुक्रवार देर शाम एमबीपीजी कॉलेज में विरोध शुरू कर दिया। छात्रों और उनके समर्थकों ने कॉलेज प्रशासन तथा विश्वविद्यालय के निर्णय के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया।


प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि यदि इन पदों पर महिला आरक्षण लागू किया जाना था तो विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत या चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही देनी चाहिए थी। चुनाव की तारीख घोषित होने और लंबे समय से तैयारी करने के बाद अंतिम समय में नियम बदलने को उन्होंने अनुचित बताया।


छात्रों का कहना है कि वे काफी समय से छात्रसंघ चुनाव की तैयारी कर रहे थे और लगातार विद्यार्थियों से संपर्क तथा प्रचार अभियान चला रहे थे। ऐसे में चुनाव से महज कुछ दिन पहले संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद आरक्षित होने से उनकी पूरी चुनावी तैयारी प्रभावित हो गई है।


विरोध के दौरान कुछ छात्रों के परिजन भी मौके पर पहुंचे। परिजनों ने आरोप लगाया कि अंतिम समय में आए निर्णय से चुनाव की तैयारी कर रहे छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन से मांग की कि छात्रों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले पर पुनर्विचार किया जाए।

परिजनों का कहना था कि कई छात्र लंबे समय से चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। उनका आरोप है कि प्रचार और चुनावी गतिविधियों में छात्रों ने काफी समय और धन खर्च किया है। ऐसे में चुनाव से कुछ दिन पहले आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने से उनमें निराशा और नाराजगी बढ़ी है।



विश्वविद्यालय की ओर से यह निर्णय उच्च शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के आधार पर लिया गया है। कार्य परिषद की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय ने चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को कराने की बात कही है।

एमबीपीजी कॉलेज के संभावित प्रत्याशियों ने इससे पहले भी कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए महिला आरक्षण की नई व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की मांग की थी। कॉलेज सहित कुछ संस्थानों की ओर से भी मौजूदा चुनाव से ठीक पहले व्यवस्था लागू किए जाने पर विवाद की आशंका जताई गई थी।
फिलहाल संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद की तैयारी कर रहे छात्रों का विरोध जारी है। कुछ छात्र विश्वविद्यालय के निर्णय को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की बात भी कह रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि चुनाव से पहले आरक्षण को लेकर जारी विरोध का क्या समाधान निकलता है और 29 सितंबर को होने वाली छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

