
स्थान : रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पार्टी के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंवर जावेद इकबाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता का संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटना कांग्रेस और उत्तराखंड की राजनीति दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

एक वार्ता के दौरान जावेद इकबाल ने कहा कि हरीश रावत के बार-बार पद छोड़ने की बात सामने आने के पीछे उन्हें कांग्रेस के अंदर एक गुट की भूमिका नजर आती है। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और उन्होंने इसके समर्थन में किसी व्यक्ति या गुट का नाम नहीं बताया।


जावेद इकबाल ने कहा कि पार्टी के अंदर की परिस्थितियों के कारण कई बार हरीश रावत निराश और हताश दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता की बातों और चिंताओं को पार्टी नेतृत्व को गंभीरता से सुनना चाहिए।


उन्होंने हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके शासनकाल में उत्तराखंड में कई विकास कार्य हुए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य की परिस्थितियों और यहां के राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर हरीश रावत की गहरी पकड़ रही है।


जावेद इकबाल ने कहा कि हरीश रावत की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में होती है। उन्होंने लंबे समय तक प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं और उत्तराखंड में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद कांग्रेस को प्रदेश में मजबूत आधार देने में हरीश रावत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि वह संगठनात्मक पदों से पूरी तरह अलग होते हैं तो पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।



जावेद इकबाल ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ उठाना चाहिए और पार्टी के अंदर किसी तरह की नाराजगी या मतभेद हैं तो उन्हें बातचीत के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस के सभी नेताओं का एकजुट रहना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि हाल में हरीश रावत ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने केवल उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी में स्थायी आमंत्रित सदस्य जैसे संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंध को भी दोहराया है।
जावेद इकबाल ने कहा कि यदि हरीश रावत सक्रिय संगठनात्मक राजनीति से पीछे हटते हैं तो इसका असर कांग्रेस की प्रदेश इकाई पर पड़ सकता है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और संगठन के भीतर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लेकर आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

