
स्थान : रामनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से “Strengthening Awareness for Wildlife Conservation” विषय पर मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण, वन विभाग के सामने आने वाली चुनौतियों और वन्यजीवों से संबंधित खबरों की जिम्मेदार रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि वन विभाग के सामने समय-समय पर वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जंगलों की सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभाग लगातार विभिन्न स्तरों पर कार्य करता है।



उन्होंने कहा कि वन विभाग की ओर से वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं। इन प्रयासों और विभाग के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों की सही जानकारी आम जनता तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।


डॉ. बडोला ने कहा कि इसी उद्देश्य से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई। कार्यशाला के माध्यम से मीडिया प्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच संवाद स्थापित करने तथा वन्यजीवों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया।


उन्होंने कहा कि वन्यजीवों से संबंधित घटनाओं को सनसनीखेज बनाने के बजाय तथ्यों और प्रमाणित जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया जाना जरूरी है। तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से लोगों तक घटना की वास्तविक तस्वीर पहुंचती है और वन्यजीवों को लेकर अनावश्यक भय या भ्रम की स्थिति पैदा होने से बचती है।

डॉ. बडोला ने उम्मीद जताई कि इस तरह की कार्यशालाओं से वन विभाग और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी सही सूचनाएं समय पर आम जनता तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी।



कार्यशाला में वन्यजीव विशेषज्ञ एवं पत्रकार डॉ. प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने भी वन्यजीव पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने लंबे पत्रकारिता अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वन्यजीवों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करते समय भाषा, तथ्यों और संदर्भ का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी खबरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो लोगों को सही और उपयोगी जानकारी दें, लेकिन भ्रामक या अनावश्यक रूप से डर पैदा करने वाली न हों। वन्यजीव संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों को जिम्मेदारी के साथ जनता तक पहुंचाना मीडिया और संबंधित संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यशाला के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच सवाल-जवाब और विचार-विमर्श भी हुआ। इसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष, संरक्षण प्रयासों और मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। आयोजन का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ ही मीडिया और वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना रहा।

