
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर :पंकज सक्सेना

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के पैरामेडिकल इंटर्न छात्र-छात्राओं का अपनी मांगों को लेकर आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। छात्र मेडिकल कॉलेज परिसर में धरना देकर अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान मानदेय दिए जाने की मांग उठा रहे हैं।

पैरामेडिकल छात्रों की चार सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से छह माह की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान प्रत्येक छात्र को कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिए जाने की मांग शामिल है। छात्रों का कहना है कि इस संबंध में लंबे समय से शासन-प्रशासन के सामने मांग रखी जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।



आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान उनसे दिन और रात की शिफ्ट में अस्पताल के विभिन्न विभागों में सेवाएं ली जाती हैं। पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और आईसीयू समेत विभिन्न चिकित्सा सेवाओं में पैरामेडिकल इंटर्न प्रशिक्षण के साथ काम करते हैं।


छात्रों का आरोप है कि नियमित रूप से अस्पताल में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें इंटर्नशिप के दौरान कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों से हल्द्वानी आने वाले कई छात्र किराए के कमरों या पीजी में रहते हैं और उन्हें भोजन, किराया तथा अन्य खर्च स्वयं उठाने पड़ते हैं।



प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि बिना मानदेय के छह महीने तक इंटर्नशिप करना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की व्यवस्था करे, जिससे प्रशिक्षण के दौरान उनके रहने और भोजन सहित आवश्यक खर्चों में मदद मिल सके।
छात्रों ने कहा कि वे अस्पताल में मरीजों की सेवा और विभिन्न विभागों के कामकाज में सहयोग करते हैं। उनका दावा है कि पैरामेडिकल इंटर्न के आंदोलन से अस्पताल की कुछ सहायक चिकित्सा सेवाओं पर भी दबाव बढ़ा है। हालांकि अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ठप होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।




आंदोलन की शुरुआत डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय परिसर से की गई थी। बाद में छात्रों ने राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में धरना शुरू किया। चौथे दिन छात्रों ने मेडिकल कॉलेज गेट से रामपुर रोड की ओर पैदल मार्च निकालकर भी अपनी मांग उठाई।

छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ ही शासन स्तर तक ज्ञापन भेज चुके हैं। 14 सितंबर को एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रों ने मांग पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।
आंदोलनरत पैरामेडिकल छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से उनकी आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इंटर्नशिप के दौरान निर्धारित मासिक स्टाइपेंड की व्यवस्था करने की मांग की है।

