
स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जनपद में आराध्य देवी और शक्ति स्वरूपा मां नंदा को समर्पित नंदा अष्टमी लोक उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ज्योतिर्मठ क्षेत्र के डांडो गांव स्थित मां नंदा देवी मंदिर में भी शनिवार को नंदा अष्टमी पर्व पर विशेष पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

नंदा अष्टमी की पूर्व संध्या पर गांव के देव फुलारी उच्च हिमालयी क्षेत्रों से दुर्लभ ब्रह्मकमल पुष्प लेकर मंदिर पहुंचे। इसके बाद ब्रह्मकमल के पुष्पों से मां नंदा का भव्य श्रृंगार किया गया। फूलों से सजे मंदिर और मां नंदा के अलौकिक स्वरूप को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए।



पूरे नंदा देवी मंदिर परिसर को गेंदे के फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर में आस्था और श्रद्धा के अखंड दीप प्रज्वलित किए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त तक मंदिर परिसर मां नंदा के पारंपरिक जागरों से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।


अष्टमी पर्व पर सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भक्तों ने मां नंदा को उत्तराखंड की बेटी ‘ध्याण’ के रूप में कलेवा, स्थानीय ऋतु फल, अनाज, पकवान और अन्य पारंपरिक सामग्री भेंट की।



उत्तराखंड में मां नंदा को शक्ति स्वरूपा के साथ ही बेटी के रूप में पूजने की प्राचीन परंपरा रही है। नंदा अष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को प्रदेश के विभिन्न नंदा देवी मंदिरों में धार्मिक और लोक परंपराओं के साथ मनाई जाती है।

पौराणिक परंपरा के अनुसार नंदा अष्टमी से दो दिन पूर्व गांव के युवा ‘देव फुलारी’ के रूप में मां नंदा का आशीर्वाद लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ब्रह्मकमल लेने के लिए रवाना होते हैं। कठिन यात्रा पूरी कर लौटने के बाद इन्हीं पुष्पों से मां नंदा का विशेष श्रृंगार किया जाता है।




बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि बद्रीनाथ धाम के प्रमुख पड़ाव ज्योतिर्मठ के डांडो गांव स्थित मां नंदा मंदिर में नंदा अष्टमी का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो दिन पूर्व गांव के युवा देव फुलारी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ब्रह्मकमल लेने गए थे और शुक्रवार देर शाम पुष्पों के साथ वापस लौटे।

उन्होंने बताया कि ब्रह्मकमल से मां नंदा का विशेष पुष्प श्रृंगार किया गया है और शनिवार को नंदा अष्टमी पर्व पूरे हर्षोल्लास तथा धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी माता के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

देर शाम पारंपरिक जागरों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां नंदा को बेटी के रूप में अपने ससुराल कैलाश के लिए भावपूर्ण विदाई दी जाएगी। इसी के साथ इस वर्ष के नंदा अष्टमी लोक उत्सव का समापन होगा। मां नंदा की विदाई के दौरान ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की भावनाएं भी उमड़ती हैं और अगले वर्ष पुनः माता के आगमन की कामना की जाती है।

