एम्स किच्छा में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, पांच आरोपी गिरफ्तार

एम्स किच्छा में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, पांच आरोपी गिरफ्तार

स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

निर्माणाधीन एम्स किच्छा में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी किए जाने के मामले का ऋषिकेश पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो लाख रुपये नकद और एमटीएस पद से संबंधित दो संदिग्ध फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार नौकरी दिलाने की एवज में 3.20 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। 15 सितंबर को एम्स ऋषिकेश के सुरक्षा विभाग की इंटेलिजेंस टीम ने संस्थान प्रशासन के साथ समन्वय कर बैराज रोड पर गोपनीय कार्रवाई की थी। इस दौरान कुछ संदिग्ध लोगों को नौकरी के नाम पर धनराशि के लेन-देन को लेकर बातचीत करते पाया गया।

बताया गया कि एम्स ऋषिकेश प्रशासन को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कुछ लोग निर्माणाधीन एम्स किच्छा में विभिन्न पदों पर नौकरी लगवाने के नाम पर अभ्यर्थियों से रुपये मांग रहे हैं और कथित रूप से फर्जी नियुक्ति पत्र भी तैयार कर रहे हैं। इसके बाद एम्स प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई।

एम्स ऋषिकेश के प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह की ओर से कोतवाली ऋषिकेश में लिखित तहरीर दी गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 463/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में जांच शुरू की।

पुलिस ने 17 सितंबर को सुब्रत बछाड़, दीपांशु मंडल, गणेश, दीपक गुसाईं और दीपना मंडल को गिरफ्तार किया। इनमें चार आरोपी ऊधम सिंह नगर क्षेत्र के जबकि एक आरोपी ऋषिकेश का निवासी बताया गया है।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से दो लाख रुपये नकद बरामद किए गए। यह राशि 500 रुपये के 400 नोटों के रूप में एक लिफाफे में रखी हुई थी। इसके अलावा राजदीप एंटरप्राइज के लेटरहेड पर तैयार एमटीएस पद से संबंधित दो संदिग्ध फर्जी नियुक्ति पत्र भी बरामद हुए हैं।

जांच के दौरान आरोपी दीपक गुसाईं से पूछताछ में नौकरी लगवाने के नाम पर विभिन्न लोगों से धनराशि लिए जाने और उसमें से 2.40 लाख रुपये एक अन्य व्यक्ति को दिए जाने की बात सामने आने का पुलिस ने दावा किया है। वहीं अन्य आरोपियों से भी रुपये के लेन-देन और कथित नौकरी नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि नौकरी के नाम पर अन्य कितने अभ्यर्थियों से रुपये लिए गए और फर्जी नियुक्ति पत्र किस स्तर पर तैयार किए गए। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और आउटसोर्स एजेंसी से संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

ऋषिकेश पुलिस का कहना है कि मामले में मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। नौकरी दिलाने के नाम पर अन्य अभ्यर्थियों से हुई संभावित ठगी, धनराशि के लेन-देन और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।