
स्थान : ज्योतिर्मठ
ब्यूरो रिपोर्ट

प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड की 10 सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं होने से नाराज ग्राम प्रधानों ने बुधवार को ज्योतिर्मठ ब्लॉक मुख्यालय में प्रदर्शन किया। प्रधान संघ ज्योतिर्मठ के अध्यक्ष मोहन बेंजवाल की अगुवाई में ग्राम प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए खंड विकास कार्यालय के विभिन्न विभागों में सांकेतिक तालाबंदी कर विरोध जताया। मोहन बेंजवाल इससे पहले भी ज्योतिर्मठ प्रधान संगठन की ओर से पंचायत संबंधी मुद्दे उठाते रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधानों ने खंड विकास अधिकारी कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में प्रदेश प्रधान संगठन की लंबित 10 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।


प्रधान संगठन ने कहा कि पिछले करीब चार माह से संगठन के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष पक्ष रख रहे हैं। संगठन का दावा है कि कई बार मांगपत्र सौंपे जाने के बावजूद अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया है।


प्रधानों ने कहा कि मांगों के लंबित रहने से प्रदेशभर के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी है। उत्तराखंड के कई अन्य विकासखंडों में भी इसी 10 सूत्रीय मांगपत्र को लेकर प्रदर्शन और तालाबंदी के कार्यक्रम घोषित किए गए हैं।


संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाकर न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह करना शामिल है। अन्य विकासखंडों में दिए गए इसी संगठन के ज्ञापनों में पंचायत सदस्यों के मानदेय, ग्राम पंचायतों के वित्तीय संसाधन बढ़ाने और पंचायतों को अधिक अधिकार देने जैसी मांगें भी शामिल हैं।

प्रधान संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में शामिल हैं। पर्याप्त संसाधन और अधिकार उपलब्ध होने से गांवों में विकास कार्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।



प्रदर्शनकारी प्रधानों ने सरकार से मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मांगों की अनदेखी होने की स्थिति में संगठन को आंदोलन और तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

ग्राम प्रधानों ने कहा कि बुधवार की तालाबंदी सरकार का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से 10 सूत्रीय मांगपत्र पर जल्द निर्णय लेकर ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

