क्यारकुली भट्टा में जमीनों के सीमांकन की मांग फिर तेज

क्यारकुली भट्टा में जमीनों के सीमांकन की मांग फिर तेज

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

ग्राम सभा क्यारकुली भट्टा में जमीनों के सीमांकन का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह सवाल बना हुआ है कि क्षेत्र में कौन सी जमीन किसकी है और ग्राम सभा की भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है।

ग्राम प्रधान मीणा कोठाल ने बताया कि जमीनों के सीमांकन को लेकर पूर्व में भी राजस्व विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीणों में असमंजस बना हुआ है।

प्रधान के मुताबिक क्षेत्र में जड्डे और नॉन-जड्डे भूमि के साथ-साथ ग्राम सभा की जमीन भी मौजूद है। लेकिन स्पष्ट सीमांकन नहीं होने के कारण यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि कौन सी भूमि किस श्रेणी में आती है और उसका वास्तविक स्वामित्व क्या है।

मीणा कोठाल ने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी को भी पहले ज्ञापन सौंपा जा चुका है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले में जल्द कार्रवाई करेगा, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि क्षेत्र में जमीनों के सौदे हो रहे हैं, लेकिन कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि बेची जा रही भूमि ग्राम सभा की है, निजी है या किसी अन्य श्रेणी की।

उन्होंने कहा कि यदि जमीनों का सही सीमांकन नहीं किया गया तो भविष्य में विवाद और बढ़ सकते हैं। जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना ग्रामीणों, खरीदारों और प्रशासन सभी के हित में है।

ग्राम प्रधान ने कहा कि यह मामला केवल भूमि सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा ग्रामीणों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए पूरे क्षेत्र का पारदर्शी तरीके से सीमांकन किया जाना जरूरी है।

ग्रामीणों ने राजस्व विभाग से जल्द सर्वे और सीमांकन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। अब नजर इस बात पर है कि लंबे समय से उठ रही शिकायतों के बाद प्रशासन जमीनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।