दूषित पानी से बीमारी और मौतों के खिलाफ ज्योलिकोट में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

दूषित पानी से बीमारी और मौतों के खिलाफ ज्योलिकोट में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

लोकेशन – नैनीताल
ब्यूरो रिपोर्ट

ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बीमारी फैलने और उपचार के दौरान तीन लोगों की मौत के मामले को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई महीनों से समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों, युवाओं और स्कूली छात्र-छात्राओं ने ज्योलिकोट में धरना-प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

धरने पर बैठे युवाओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में दूषित पेयजल की समस्या को लेकर लगातार शिकायतों के बावजूद समय रहते प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की सुध नहीं ली। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग बीमारियों की चपेट में आ गए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक बीमारी के उपचार के दौरान तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।

ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक और सांसद पर भी क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यदि समय रहते दूषित पानी की समस्या का समाधान कर दिया जाता और प्रभावित लोगों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

धरना-प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन से स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था, बीमार लोगों के लिए बेहतर और निशुल्क उपचार तथा बीमारी के चलते जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद लंबे समय से समस्या झेल रहे ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि स्वच्छ पानी की स्थायी व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को राहत मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।