लोहाघाट में कार्य बहिष्कार कर दिया धरना, अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार और 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

लोहाघाट में कार्य बहिष्कार कर दिया धरना, अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार और 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

मानदेय बढ़ाने और सरकारी कर्मचारी घोषित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार को लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में आशा कार्यकर्ताओं ने कार्य बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

चंपावत आशा कार्यकर्ता संगठन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के निर्देश और पदमा प्रथोली के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग 24 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की है। उनका कहना है कि कई बार आंदोलन और ज्ञापन के बावजूद सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया।

आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि चंपावत जिले में एक सितंबर से प्रत्येक मंगलवार को कार्य बहिष्कार कर दो घंटे का धरना दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सितंबर तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आशा कार्यकर्ता बेहद कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े काम करती हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में दूर-दराज के गांवों तक पहुंचने और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनके मूल कार्यों के अतिरिक्त कई अन्य जिम्मेदारियां भी लगातार दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके अनुरूप उन्हें आर्थिक और सेवा संबंधी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

प्रदर्शन में शामिल आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले करीब पांच महीने से उन्हें मानदेय नहीं मिला है। इससे परिवार का भरण-पोषण करने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से लंबित मानदेय तत्काल जारी करने की मांग की।

आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र बनाया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने की भी मांग की।

आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर भी विचार करेंगी। उन्होंने सरकार से 24 हजार रुपये मासिक मानदेय, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और लंबित भुगतान जल्द देने की मांग दोहराई।