
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड के हिमाच्छादित और दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों की जनगणना को लेकर देहरादून स्थित जनगणना निदेशालय में विशेष प्रशिक्षण शुरू हो गया है। प्रशिक्षण में सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में गणना की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी दी जा रही है।


उत्तराखंड की सीमाएं चीन और नेपाल से लगी होने के कारण राज्य सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में तैनात सेना, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा कर्मियों की गणना भी राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।



सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना आम नागरिकों की जनगणना से अलग व्यवस्था के तहत की जाएगी। संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा तथा गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाएगी।



इन क्षेत्रों में जनगणना के लिए डिजिटल ऐप का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। जवानों और अन्य सुरक्षाकर्मियों से संबंधित विवरण पेपर मोड में दर्ज किए जाएंगे, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जा सके।


जनगणना प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए संबंधित सैन्य और अर्धसैनिक बलों के नोडल अधिकारी, चार्ज अधिकारी, सुपरवाइजर और प्रगणक नियुक्त किए जाएंगे। इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

पेपर पर एकत्र किए गए आंकड़ों को बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिजिटल स्वरूप में बदला जाएगा। इसके बाद इन आंकड़ों को देश की कुल जनसंख्या के आंकड़ों में शामिल किया जाएगा।




उत्तराखंड के चार जिलों में आईटीबीपी, एसएसबी और सीमा सड़क संगठन से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों को इस प्रक्रिया के लिए चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए विशेष तैयारी की जा रही है।

पहले चरण में करीब 35 कार्मिकों को जनगणना से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान पेपर फॉर्म भरने, आंकड़ों की शुद्धता बनाए रखने और गोपनीय जानकारी के सुरक्षित प्रबंधन से संबंधित दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों की जनगणना के लिए शुरू हुआ यह विशेष प्रशिक्षण आगामी गणना प्रक्रिया की तैयारियों का अहम हिस्सा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद चिन्हित क्षेत्रों में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जवानों और अन्य सुरक्षाकर्मियों की गणना की जाएगी।

