तीन दिनों से देवी-देवताओं के दर्शन का दावा, पांच मंदिर बनाने का संकल्प

तीन दिनों से देवी-देवताओं के दर्शन का दावा, पांच मंदिर बनाने का संकल्प

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सर्कार

देवभूमि उत्तराखंड में आस्था और विश्वास से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। भक्त ओम प्रकाश निषाद ने दावा किया है कि पिछले तीन दिनों से उन्हें भगवान शिव, माता पार्वती और माता रानी के दर्शन हो रहे हैं।

ओम प्रकाश निषाद के मुताबिक, माता रानी ने उन्हें पांच मंदिरों का निर्माण कराने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि इसी कथित आदेश के बाद उन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है और इसे पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है।

भक्त ने दावा किया कि मंदिरों के निर्माण के लिए उन्होंने अपने गांव के सामने स्थित करीब एक एकड़ जमीन दान करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह जमीन पूरी तरह धार्मिक कार्य और प्रस्तावित मंदिरों के निर्माण के लिए समर्पित की जाएगी।

ओम प्रकाश निषाद ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें पिछले तीन दिनों से शिव-पार्वती और माता रानी के दर्शन हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि माता रानी ने उनसे पांच मंदिर बनवाने के लिए कहा है और इसी उद्देश्य से उन्होंने अपनी जमीन देने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि जमीन उपलब्ध कराने के बाद अब मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक और अन्य प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी। इसे लेकर उन्होंने उत्तराखंड के साथ-साथ देशभर के लोगों से सहयोग की अपील की है।

भक्त के अनुसार प्रस्तावित मंदिर सनातन धर्म को समर्पित होंगे। उन्होंने क्षेत्र के लोगों, धार्मिक संगठनों और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों से इस धार्मिक संकल्प को पूरा करने में सहयोग करने की बात कही है।

ओम प्रकाश निषाद का कहना है कि उनका उद्देश्य मंदिरों का निर्माण कर क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं को बढ़ावा देना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थानीय लोगों के साथ देशभर से भी उन्हें इस कार्य में सहयोग मिलेगा।

हालांकि भगवान शिव, माता पार्वती और माता रानी के दर्शन होने तथा कथित तौर पर मंदिर निर्माण का आदेश मिलने की बात ओम प्रकाश निषाद की व्यक्तिगत आस्था और दावा है। इस दावे की कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

फिलहाल यह मामला आस्था, विश्वास और भक्ति से जुड़ा होने के कारण स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। अब यह देखना होगा कि पांच मंदिरों के निर्माण का प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ता है और इस संकल्प को पूरा करने के लिए भक्त को कितना जनसहयोग मिलता है।