ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में वेदना प्रबंधन पर कार्यशाला

ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में वेदना प्रबंधन पर कार्यशाला

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में आयुर्वेद में वेदना प्रबंधन विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने भी प्रतिभाग किया और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

आरोग्य भारती उत्तराखंड की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में आयुर्वेद के विशेषज्ञ, चिकित्सक, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद चिकित्सा में दर्द निवारण की विभिन्न पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद में वेदना प्रबंधन यानी पेन रिलीफ से जुड़ी उपचार पद्धतियों के बारे में जानकारी साझा करना और इनकी उपयोगिता को आम लोगों तक पहुंचाना रहा।

आयुर्वेद विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के दर्द के उपचार में पारंपरिक आयुर्वेदिक विधियों, औषधियों और अन्य उपचार पद्धतियों की भूमिका पर अपने विचार रखे। साथ ही आधुनिक समय में इनके वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोग पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में इस बात पर भी मंथन किया गया कि आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों को अधिक लोकप्रिय कैसे बनाया जाए और ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इनका लाभ किस प्रकार उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाने पर जोर दिया गया।

आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड में आयुष क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा की व्यापक संभावनाएं हैं और इन्हें बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है।

मदन कौशिक ने कहा कि आयुर्वेद केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। सरकार का प्रयास है कि आयुष सेवाओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ आम लोगों तक पहुंचाया जाए।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित तीन राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थानों में से एक संस्थान उत्तराखंड में स्थापित कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र के स्तर पर लगातार पहल कर रही है।

कार्यशाला के दौरान आयुर्वेद के विकास, शोध, प्रशिक्षण और उपचार पद्धतियों को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और विद्यार्थियों के साथ चिकित्सकों को भी नई जानकारी प्राप्त होगी।