बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष, गुलदारों की चहलकदमी से दहशत में पहाड़

बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष, गुलदारों की चहलकदमी से दहशत में पहाड़

स्थान : अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

पहाड़ी क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव संघर्ष का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। तेंदुए और गुलदार जंगलों की सीमा लांघकर अब रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। आए दिन आबादी के बीच वन्यजीवों की मौजूदगी से ग्रामीणों और शहरवासियों में दहशत का माहौल है।

अल्मोड़ा जिले में भी पिछले कुछ वर्षों में यह समस्या लगातार गंभीर हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में भोजन की कमी के चलते तेंदुओं का मूवमेंट अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। यहां तक कि अल्मोड़ा शहर में भी गुलदारों की चहलकदमी अब आम होती जा रही है।

बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों में जिले में तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही वन्यजीवों की जीवनशैली में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जंगलों में पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास आसानी से उपलब्ध भोजन और शिकार की तलाश में पहुंच रहे हैं।

अल्मोड़ा जिले में पिछले कुछ समय के दौरान वन्यजीवों के हमले और आबादी में तेंदुओं के पहुंचने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिहायशी बस्तियों के आसपास गुलदार दिखाई देने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से लगातार जागरूकता और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। लोगों का कहना है कि गुलदारों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए प्रभावी और दीर्घकालिक कार्ययोजना की जरूरत है।

वहीं, वन विभाग का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अल्मोड़ा के डीएफओ के मुताबिक, विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं और वन्यजीवों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए टीमें अलर्ट मोड पर हैं।

वन विभाग के अनुसार पिछले आठ महीनों में आठ तेंदुओं को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर पकड़ा गया है। विभाग का दावा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में टीमों को सतर्क रखा गया है और वन्यजीवों की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही लोगों से भी सावधानी बरतने और वन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

अब सरकार प्रदेश में तेंदुओं की संख्या का आंकलन करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की बात कह रही है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि प्रस्तावित गणना अभियान और कार्ययोजना जमीन पर कितना प्रभाव डालती है। फिलहाल पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें गुलदार के बढ़ते खौफ से स्थायी राहत कब मिलेगी।