मंडियों की सफाई पर सवाल, लाखों के ठेके के बावजूद गंदगी का अंबार

मंडियों की सफाई पर सवाल, लाखों के ठेके के बावजूद गंदगी का अंबार

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

उत्तराखंड की मंडियों में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर स्वच्छता अभियान के तहत बेहतर काम करने वालों को सम्मानित किया जा रहा है, वहीं हल्द्वानी समेत प्रदेश की कई मंडियों में सफाई व्यवस्था बदहाल होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण मंडी परिसर में रहना और कारोबार करना मुश्किल हो रहा है।

आरोप है कि उत्तराखंड की 26 मंडियों में स्वच्छता और सफाई व्यवस्था का ठेका भारतीय जनता पार्टी के पूर्व ओबीसी जिला अध्यक्ष नन्हे कश्यप को दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि इसके लिए मंडियों से करीब 30 से 35 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है। हालांकि, इस भुगतान के एवज में मंडियों में अपेक्षित सफाई व्यवस्था दिखाई नहीं देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

कुमाऊं की सबसे बड़ी अनाज मंडी कही जाने वाली हल्द्वानी मंडी में भी सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी जमा है और दुर्गंध के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरोप है कि सफाई के नाम पर केवल दो से तीन कर्मचारी ही लगाए गए हैं, जबकि मंडी की जरूरत के हिसाब से कहीं अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्द्वानी मंडी में करीब 14 से 25 कर्मचारियों की जरूरत होने के बावजूद सफाई व्यवस्था पर्याप्त कर्मचारियों के भरोसे नहीं चल रही है। उनका आरोप है कि सीमित कर्मचारियों के माध्यम से केवल खानापूर्ति की जा रही है। यही स्थिति प्रदेश की अन्य मंडियों में भी होने का दावा किया जा रहा है, जहां सफाई व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है।

मामले को लेकर मंडी परिषद के अध्यक्ष का कहना है कि सफाई का ठेका टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया गया है। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायत सामने आई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उनके मुताबिक ठेकेदार को भुगतान मंडी सचिव की संतुष्टि और सत्यापन के बाद ही किया जाता है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि भुगतान से पहले मंडी सचिव द्वारा सफाई व्यवस्था को संतोषजनक बताया जाता है तो फिर मौके पर गंदगी और अव्यवस्था की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

इस मामले में ठेकेदार नन्हे कश्यप से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं मंडी सचिव ने भी मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से इनकार किया। ऐसे में अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सफाई व्यवस्था में कथित लापरवाही की वास्तविक वजह क्या है।

फिलहाल मंडियों में सफाई व्यवस्था और ठेके के भुगतान को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मंडियों में लगाए गए कर्मचारियों की संख्या, सफाई कार्य की वास्तविक स्थिति, ठेकेदार को किए गए भुगतान और मंडी सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट की जांच कराई जाए। अब देखना होगा कि शिकायत और सामने आई तस्वीरों के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।