अमाऊं में अवैध कब्जे और निर्माण का विवाद गहराया

अमाऊं में अवैध कब्जे और निर्माण का विवाद गहराया

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

खटीमा के अमाऊं क्षेत्र में सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध कब्जे, अनधिकृत प्लॉटिंग और मजार परिसर के आसपास दुकानों के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा है। मामले को लेकर प्रशासन से राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

राज्य दर्जा राज्य मंत्री कैप्टन गंभीर सिंह धामी ने ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि क्षेत्र में निर्माणाधीन दुकानें नियमों के विपरीत बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण अवैध पाया जाता है तो अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अमाऊं क्षेत्र स्थित मजार के पीछे तथा वार्ड संख्या 03 और 05 में बड़े पैमाने पर सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर अनधिकृत प्लॉटिंग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्णागिरि कॉलोनी स्थित मंदिर के आसपास की भूमि को भी कब्जे में लेकर बाहरी लोगों को बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण और नियमों के विरुद्ध प्लॉटिंग की पुष्टि होती है तो तत्काल प्रभाव से ऐसे निर्माण और भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जाए।

इधर पीलीभीत रोड स्थित कब्रिस्तान में दुकानों के नव-निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि प्रशासन की ओर से पीलीभीत रोड और अमाऊं मजार से जुड़े निर्माण कार्य को फिलहाल रुकवाया गया है। वहीं कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष शाहरुख खान ने निर्माण को लेकर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की अनुमति से संबंधित दस्तावेज मीडिया के सामने पेश किए हैं।

शाहरुख खान के अनुसार वक्फ संख्या 549 स्थित कब्रिस्तान की दुकानों के ऊपर नए निर्माण की सशर्त अनुमति उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से प्राप्त है। उनके मुताबिक बोर्ड की शर्तों के अनुसार निर्माण के लिए वक्फ संपत्ति को बंधक या गिरवी नहीं रखा जाएगा और दुकानों के निर्माण के लिए किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया जाएगा। निर्माण में होने वाले पूरे खर्च को कब्रिस्तान के आय-व्यय रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि दुकानों का आवंटन भी वक्फ पट्टा नियम-2014, संशोधित 2020, के तहत बोर्ड की निगरानी में किया जाएगा। दूसरी ओर अमाऊं स्थित मजार के पीछे कथित अतिक्रमण को लेकर जब मीडिया ने मजार कमेटी के अध्यक्ष से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में इस हिस्से पर कमेटी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।

फिलहाल मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप सही पाए जाने की स्थिति में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने तथा नियमों के विरुद्ध भूमि की खरीद-फरोख्त करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और शासन-प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।