
स्थान : बाज़पुर
रिपोर्टर : विशेष शर्मा

सहकारी क्षेत्र की ऐतिहासिक बाजपुर चीनी मिल में अगस्त माह का वेतन और पिछले वर्ष के रेल किराये का भुगतान नहीं होने से नाराज श्रमिकों ने मंगलवार को कार्य स्थगित कर मिल गेट के अंदर धरना दिया। श्रमिकों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग उठाई।

बाजपुर सहकारी चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी और इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। लंबे समय तक चीनी की गुणवत्ता और गन्ना किसानों के भुगतान के मामले में मिल की अलग पहचान रही। बाद में वर्ष 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में इसकी सह इकाई के रूप में आसवनी की स्थापना की गई थी।



आसवनी इकाई से होने वाली आय ने लंबे समय तक चीनी मिल को आर्थिक सहारा दिया। श्रमिकों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उत्तर प्रदेश से मिलने वाला गन्ना क्षेत्र कम होने, देसी मदिरा की आपूर्ति का क्षेत्र घटने और अन्य आर्थिक कारणों से मिल की वित्तीय स्थिति कमजोर होती चली गई। बाद में आसवनी इकाई भी बंद हो गई।

वर्तमान में मिल कर्मचारियों में अगस्त माह का वेतन और पिछले वर्ष के रेल किराये का भुगतान लंबित होने को लेकर नाराजगी है। भुगतान नहीं मिलने से आक्रोशित श्रमिकों ने काम बंद कर धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर मिल प्रबंधन से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।



धरने के दौरान श्रमिकों ने किच्छा से आकर मुख्य लेखाकार का कार्य देख रहे संजय पांडे के खिलाफ भी नाराजगी जताई। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के भुगतान को लंबित रखते हुए ठेकेदारों के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही उन्होंने स्थानांतरण और निलंबन की धमकी दिए जाने के भी आरोप लगाए। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है।
आंदोलनरत श्रमिकों ने संजय पांडे को बाजपुर से हटाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। कर्मचारियों का कहना था कि नियमित वेतन और अन्य देयकों का समय पर भुगतान उनका अधिकार है और भुगतान में लगातार देरी से परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है।




चीनी मिल की प्रधान प्रबंधक का कार्यभार देख रहीं एसडीएम रिचा सिंह प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने के कारण मौके पर नहीं पहुंच सकीं। इसके बाद प्रभारी प्रधान प्रबंधक एवं मुख्य रसायनविद उपेंद्र शुक्ला ने दूरभाष के माध्यम से एसडीएम से वार्ता की और आंदोलनरत श्रमिकों की भी उनसे बात कराई।
वार्ता के दौरान श्रमिकों को आश्वासन दिया गया कि अगस्त माह के बकाया वेतन का चेक उसी दिन हस्ताक्षरित कर दिया जाएगा, जबकि पिछले वर्ष के लंबित रेल किराये का भुगतान भी शीघ्र कराया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने धरना स्थगित कर दिया और दोबारा अपने-अपने कार्य पर लौट गए।

