स्थान : रामनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब बाघों के संरक्षण के साथ-साथ संकटग्रस्त घड़ियालों के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। भारत सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से शुरू हुई यह विशेष शोध परियोजना अगले दो से ढाई वर्षों तक चलेगी, जिसके माध्यम से घड़ियालों के आवास, आबादी और नेस्टिंग साइट्स का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।


कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां बाघ, तेंदुआ, एशियाई हाथी, भालू, हिरणों की कई प्रजातियां, 500 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां तथा अनेक दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। अब इस जैव विविधता को और मजबूत करने के उद्देश्य से संकटग्रस्त (क्रिटिकली एंडेंजर्ड) घड़ियालों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।



कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य घड़ियालों के प्राकृतिक आवास की मैपिंग करना, उनकी वास्तविक आबादी का आकलन करना तथा नेस्टिंग साइट्स का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। अध्ययन के आधार पर भविष्य में संरक्षण की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी।


उन्होंने बताया कि शोध के दौरान यह भी देखा जाएगा कि घड़ियाल किन स्थानों पर अंडे देते हैं, उन नेस्टिंग साइट्स को किस प्रकार के खतरे हैं और उनके संरक्षण के लिए कौन-कौन से उपाय आवश्यक हैं। इससे घड़ियालों के प्रजनन और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
डॉ. बडोला के अनुसार हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में लगभग 150 से 200 घड़ियाल दर्ज किए गए हैं, जिनमें नर, मादा और शावक शामिल हैं। वहीं उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार कॉर्बेट क्षेत्र में 197 मगरमच्छ, 183 घड़ियाल और 161 ओटर्स मौजूद हैं, जो यहां की समृद्ध जलीय जैव विविधता का प्रमाण हैं।

उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत मानसून से पहले पहला सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब बारिश समाप्त होने के बाद दूसरा विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर संरक्षण की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से होकर बहने वाली रामगंगा नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और ओटर्स जैसे दुर्लभ जलीय जीवों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध परियोजना न केवल कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में घड़ियाल संरक्षण को नई दिशा देगी, बल्कि देशभर में जलीय जैव विविधता और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

