स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

कुमाऊंनी संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से हल्द्वानी में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, महिला प्रकोष्ठ जिला नैनीताल की ओर से आगामी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) को हरेला क्वीन, सावन क्वीन और कुमाऊंनी व्यंजन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।


कार्यक्रम का आयोजन हल्द्वानी स्थित परिणय वाटिका बैंक्वेट हॉल में शाम 3 बजे से किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ आईजी नैनीताल श्रीमती निवेदिता कुकरेती द्वारा किया जाएगा।



महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष कुसुम दिगारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक कुमाऊंनी व्यंजनों को समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि हरेला पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण बचाने का संदेश देने वाला पर्व है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को पौधा रोपड़ और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही हरेला क्वीन और सावन क्वीन प्रतियोगिताओं के जरिए महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
कुमाऊंनी व्यंजन प्रतियोगिता में उत्तराखंड के पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ ही महिलाओं को अपनी कला और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करते हैं।

महिला प्रकोष्ठ ने सभी महिलाओं और जनपदवासियों से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। आयोजन को सफल बनाने के लिए तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं।


प्रेस वार्ता में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष कुसुम दिगारी, जिला महामंत्री ऊर्वशी बोरा, कोषाध्यक्ष विनीता शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्योति मेहता, कंचन कनवाल, नीता मेहरा, जिला संरक्षक इंद्र कुमार भटियानी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष विपिन गुप्ता, युवा जिलाध्यक्ष प्रदीप सब्बरवाल, जिला महामंत्री हर्ष वर्द्धन पांडे और महिला प्रकोष्ठ की जिला मीडिया प्रभारी नीरू भल्ला भी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर हल्द्वानी में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम कुमाऊंनी संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संगम बनेगा, जहां उत्तराखंड की लोक परंपराओं और विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

