

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

विश्व धरोहर फूलों की घाटी और हेमकुंड-लोकपाल वैली इन दिनों उत्तराखंड के राज्य पुष्प ब्रह्मकमल की अलौकिक महक से गुलजार हैं। इस वर्ष पहली बार ब्रह्मकमल अपने निर्धारित समय, जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के प्रथम सप्ताह में बड़ी संख्या में खिला है। ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में इसकी खिली हुई क्यारियां श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं।


हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को लोकपाल घाटी, भ्यूंडार वैली और कुंठ खाल क्षेत्र में दुर्लभ देवपुष्प ब्रह्मकमल के दर्शन हो रहे हैं। खासकर हेमकुंड सरोवर के ऊपर स्थित पथरीले उच्च हिमालयी क्षेत्र और सप्तश्रृंग शिखरों के आधार क्षेत्र में ब्रह्मकमल अपनी प्राकृतिक छटा बिखेर रहा है। इसकी मनमोहक सुगंध से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर हो गया है।



फूलों की घाटी में मानसून के बाद अब ब्लू पॉपी सहित कई दुर्लभ हिमालयी और विदेशी प्रजातियों के फूल भी खिलने लगे हैं। वन विभाग के अनुसार उत्तराखंड में ब्रह्मकमल की लगभग 28 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से विकसित होती हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र वनस्पति विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मकमल को माता नंदा का प्रिय पुष्प माना जाता है। यह वर्ष में केवल एक बार खिलता है और इसकी विशेषता यह है कि इसका पूर्ण खिलना मुख्य रूप से रात्रि के समय होता है। आयुर्वेद में भी इस पुष्प का विशेष महत्व बताया गया है तथा पारंपरिक रूप से इसका उपयोग जले-कटे, सर्दी-जुकाम और हड्डियों के दर्द जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अभिमन्यु ने बताया कि ब्रह्मकमल केवल उत्तराखंड का राज्य पुष्प ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि इस दुर्लभ पुष्प को तोड़ना, नुकसान पहुंचाना या इसके प्राकृतिक आवास से छेड़छाड़ करना वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है।


वन विभाग ने हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित ट्रैक मार्गों पर ही आवाजाही करें। ब्रह्मकमल और अन्य दुर्लभ वनस्पतियों के प्राकृतिक आवास को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचाएं तथा जैव विविधता के संरक्षण में सहयोग करें।



हर वर्ष सीमित अवधि के लिए खिलने वाला ब्रह्मकमल उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का अनमोल प्रतीक है। इस बार समय पर हुए पुष्पन ने हेमकुंड-लोकपाल और फूलों की घाटी की सुंदरता को और भी बढ़ा दिया है। प्रकृति और आस्था का यह अद्भुत संगम इन दिनों देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

