
स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट


दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। रंग-बिरंगी झालरों, आकर्षक लाइटों, सजावटी सामान, मिठाइयों, कपड़ों और उपहारों से दुकानें सज चुकी हैं। बाजारों में त्योहार की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और हर तरफ दीपावली का उत्साह दिखाई दे रहा है। लेकिन इस चकाचौंध के बीच स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें भी नजर आ रही हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन ने छोटे व्यापारियों के सामने कारोबार को बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।


स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पहले दीपावली के त्योहार से कई दिन पहले ही बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ने लगती थी। सुबह से देर शाम तक दुकानों पर खरीदारी करने वालों का तांता लगा रहता था। त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री से व्यापारियों को पूरे साल के कारोबार में अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने से स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की संख्या और बिक्री प्रभावित होने लगी है।





दुकानदारों के मुताबिक, अब बड़ी संख्या में ग्राहक बाजारों में सामान देखने और कीमतों की जानकारी लेने तो पहुंचते हैं, लेकिन खरीदारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से करना अधिक पसंद करते हैं। ऑनलाइन कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले आकर्षक डिस्काउंट, कैशबैक, विशेष ऑफर्स और घर बैठे सामान मंगाने की सुविधा ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसका सीधा असर स्थानीय दुकानदारों की बिक्री पर पड़ रहा है।


व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन बाजार से मुकाबला करना छोटे दुकानदारों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों को दुकान का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों का वेतन, सामान के रखरखाव और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली भारी छूट के बराबर कीमतों पर सामान बेचना उनके लिए आसान नहीं है। इसके चलते कई दुकानदारों को कम मुनाफे में कारोबार करना पड़ रहा है।


दीपावली के अवसर पर विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, सजावटी वस्तुएं, घरेलू उपयोग की सामग्री और उपहारों की खरीदारी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता स्थानीय व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार पहले त्योहारों के दौरान इन वस्तुओं की बिक्री में काफी तेजी आती थी, लेकिन अब ग्राहक ऑनलाइन बाजार में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों और कीमतों की तुलना करने के बाद खरीदारी कर रहे हैं।

स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा ने ग्राहकों की आदतों में बड़ा बदलाव किया है। मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में सामान पसंद करने, कीमतों की तुलना करने और घर तक डिलीवरी मिलने के कारण लोगों का रुझान डिजिटल बाजार की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, स्थानीय दुकानों से खरीदारी करने पर ग्राहकों को सामान की गुणवत्ता देखने, तुरंत सामान प्राप्त करने और जरूरत पड़ने पर दुकानदार से सीधे संपर्क करने की सुविधा भी मिलती है।




व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय बाजार केवल खरीदारी के केंद्र नहीं हैं, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार भी हैं। छोटे दुकानदारों के कारोबार से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है। त्योहारों के दौरान स्थानीय दुकानों पर होने वाली खरीदारी से व्यापारियों के साथ कर्मचारियों, छोटे आपूर्तिकर्ताओं और अन्य व्यवसायों को भी लाभ मिलता है। ऐसे में बाजारों की बिक्री प्रभावित होने का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ व्यापारियों को उम्मीद है कि अंतिम दिनों में बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और खरीदारी में तेजी आएगी। दुकानदारों का कहना है कि धनतेरस और दीपावली के आसपास लोग परंपरागत रूप से कपड़े, मिठाइयां, पूजा सामग्री, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं। ऐसे में त्योहार के अंतिम दिनों में बिक्री बढ़ने से स्थानीय कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
व्यापारियों ने लोगों से स्थानीय दुकानों से भी खरीदारी करने की अपील की है। उनका कहना है कि त्योहारों की असली रौनक बाजारों की चहल-पहल और दुकानदारों से जुड़ी होती है। स्थानीय कारोबार को समर्थन मिलने से छोटे व्यापारियों और उनसे जुड़े परिवारों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है। फिलहाल दीपावली की चमक के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या त्योहार के अंतिम दिनों में बाजारों की पुरानी रौनक और व्यापारियों की कमाई लौट पाएगी या ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती पकड़ स्थानीय कारोबारियों के लिए चुनौती बनी रहेगी।

