चम्पावत को कीवी उत्पादन का हब बनाने की तैयारी, दो करोड़ की लागत से 24 एकड़ में होगी कीवी की खेती

चम्पावत को कीवी उत्पादन का हब बनाने की तैयारी, दो करोड़ की लागत से 24 एकड़ में होगी कीवी की खेती

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने, गांवों में स्वरोजगार के अवसर विकसित करने और रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मंगलवार को चम्पावत जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में कीवी महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी मनीष कुमार और विशिष्ट अतिथि दर्जा राज्य मंत्री रामपाल सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान कीवी उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर कृषि और बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चम्पावत की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां कीवी उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल हैं। किसान पारंपरिक खेती के साथ कीवी उत्पादन अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने किसानों से विशेषज्ञों और अनुभवी उत्पादकों से तकनीकी जानकारी लेकर उसे अपने बागानों में लागू करने की अपील की।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में जिला योजना के अंतर्गत लगभग दो करोड़ रुपये की धनराशि से इस वर्ष करीब 24 एकड़ क्षेत्र में कीवी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चम्पावत को कीवी उत्पादन के हब के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने किसानों से कीवी के अलावा सेब उत्पादन, मौनपालन और अन्य बागवानी गतिविधियों को भी अपनाने का आह्वान किया।

दर्जा राज्य मंत्री रामपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कृषि और बागवानी को रोजगार का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कीवी जैसी नकदी फसलों की खेती से किसानों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे गांवों से हो रहे पलायन को रोकने और रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कीवी महोत्सव को किसानों और विशेषज्ञों के बीच अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।

महोत्सव में नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत सहित विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने प्रतिभाग किया। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर कीवी और अन्य स्थानीय उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों से बागान प्रबंधन, उत्पादन, सिंचाई और विपणन में आने वाली समस्याओं के बारे में पूछा तथा उद्यान विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान कुल नौ स्टॉल लगाए गए, जहां लोगों ने स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बागेश्वर के ‘कीवी मैन’ के नाम से प्रसिद्ध प्रगतिशील किसान भवान सिंह कोरंगा ने कीवी उत्पादन से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी साझा की। उन्होंने युवाओं से गांव छोड़कर पलायन करने के बजाय कीवी की खेती अपनाकर स्वरोजगार शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार बागवानी के क्षेत्र में किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रही है। युवा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से कीवी उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं।

वहीं, अल्मोड़ा के जागेश्वर स्थित आरतोला से पहुंचीं महिला कीवी उत्पादक विद्या भट्ट और नीमा भट्ट ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने करीब 15 वर्ष पहले कीवी की खेती शुरू की थी। आज उनके बगीचे में 1,500 से अधिक कीवी के पौधे हैं और एक सीजन में लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक की कीवी बेचती हैं। उन्होंने कहा कि कीवी उत्पादन में अच्छी आमदनी की संभावनाएं हैं, लेकिन किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा और स्थायी बाजार की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से कीवी उत्पादकों के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था और पानी की उचित सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान एपीडा के प्रबंधक विशाल सैनी ने चम्पावत में उत्पादित फलों के निर्यात की संभावनाओं पर जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट के अविकल कुमार ने औद्यानिकी विकास की संभावनाओं, नर्सरी डेवलपमेंट अधिकारी दीपिका शर्मा ने मृदा एवं जल प्रबंधन तथा उद्यान निरीक्षक आशीष रंजन ने जनपद में कीवी उत्पादन की प्रगति पर प्रकाश डाला। उद्यान निरीक्षक प्रदीप पचौली ने सूक्ष्म सिंचाई, दिनेश बिष्ट ने फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, प्रगतिशील कृषक कमल गिरी ने बागवानी को पर्यटन से जोड़ने और शहद उत्पादक हरीश जोशी ने मौनपालन की संभावनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी।

महोत्सव के दौरान 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से लगभग 40 हजार रुपये की कीवी की बिक्री हुई। कीवी उत्पादन एवं बागवानी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर प्रथम स्थान प्राप्त मनोज कोरंगा, द्वितीय स्थान प्राप्त रमेश चंद्र खर्कवाल और तृतीय स्थान प्राप्त पीताम्बर गहतोड़ी को जिलाधिकारी मनीष कुमार ने प्रमाण पत्र एवं शील्ड देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कीवी उत्पादकों ने सरकार से अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार, उचित मूल्य और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने कहा कि यदि उत्पादन के साथ विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए तो कीवी की खेती पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण साधन बन सकती है।