उत्तराखंड में जमीन को लेकर सियासी घमासान, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप

उत्तराखंड में जमीन को लेकर सियासी घमासान, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के आवंटन, भू-कानून और ऐतिहासिक धरोहरों की संपत्तियों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए जमीन के मुद्दे को उछालने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस की मुख्य प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रदेश सरकार पर सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने के गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदेश में अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए इस तरह के अभियान चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सख्त भू-कानून लागू कर राज्य की जमीनों के संरक्षण की दिशा में कदम उठाए हैं।

विनोद चमोली ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए जमीन आवंटनों का मुद्दा उठाते हुए नैनीसार भूमि आवंटन प्रकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि अपने शासनकाल में जमीनों के आवंटन को लेकर उठे विवादों पर पार्टी का क्या जवाब है। चमोली ने कहा कि भूमि संरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल के फैसलों का हिसाब देना चाहिए।

भाजपा विधायक ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद और गढ़वाल क्षेत्र में करीबियों को 52 संपत्तियां दिए जाने के कथित मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में जमीनों से जुड़े कई विवाद सामने आए थे, लेकिन अब वही पार्टी भूमि संरक्षण के नाम पर प्रदेश सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि धामी सरकार द्वारा बनाए गए कड़े भू-कानून से प्रदेश की जमीनों की सुरक्षा को मजबूती मिली है।

दूसरी ओर, कांग्रेस की मुख्य प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा विधायक के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की डबल इंजन सरकार जनता के साथ ‘डबल धोखा’ कर रही है। दसौनी ने कहा कि एक ओर सरकार प्रदेश की जमीनों को बचाने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर मूल्यवान सरकारी संपत्तियों को निजी संस्थाओं के हवाले करने के फैसले लिए जा रहे हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने दावा किया कि उत्तराखंड में करीब एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों और वर्ष 1867 से 1928 के बीच निर्मित ऐतिहासिक धरोहर भवनों को 60 से 90 वर्षों की लंबी लीज पर निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से प्रदेश की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और संपत्तियों के मूल्यांकन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गरिमा दसौनी ने ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की 633 एकड़, डाकपत्थर की 180 एकड़ और जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की 142 एकड़ भूमि का जिक्र करते हुए इनके आवंटन और उपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन महत्वपूर्ण जमीनों की बंदरबांट की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार से इन संपत्तियों से जुड़े निर्णयों, लीज की शर्तों और आवंटन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

कांग्रेस की मुख्य प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की महत्वपूर्ण संपत्तियों से जुड़े फैसले सामूहिक कैबिनेट की प्रक्रिया के बजाय मुख्यमंत्री स्तर पर लिए जा रहे हैं। दसौनी ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण जमीनों और सरकारी परिसंपत्तियों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा अकेले निर्णय लिए जाने के आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस ने भूमि से जुड़े इन कथित मामलों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ अभियान तेज करने के संकेत दिए हैं। गरिमा दसौनी के अनुसार कांग्रेस नेता राज्य के अलग-अलग स्थानों पर सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों से जुड़े मामलों को जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी इन मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगेगी। वहीं, भाजपा कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक अभियान बताते हुए धामी सरकार के भू-कानून और भूमि संरक्षण संबंधी कदमों का बचाव कर रही है। ऐसे में जमीनों का मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव का प्रमुख विषय बनता दिखाई दे रहा है।

इस बीच, कांग्रेस ने 4 नवंबर 2026 को प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर भूमि संबंधी मुद्दों को लेकर विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी ने ऋषिकेश, विकासनगर और मसूरी सहित कई क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए 57 भूमि आवंटनों में से 52 गढ़वाल क्षेत्र में होने का आरोप लगाया है। दोनों दलों के दावों और आरोपों के बीच संबंधित भूमि आवंटनों की वैधानिक स्थिति तथा सरकारी अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है।