अल्मोड़ा के डोल आश्रम में कृष्ण अखंड ज्योति एवं आधारशिला का विधि-विधान से पूजन, संतों ने लिया धार्मिक संकल्प

अल्मोड़ा के डोल आश्रम में कृष्ण अखंड ज्योति एवं आधारशिला का विधि-विधान से पूजन, संतों ने लिया धार्मिक संकल्प

स्थान : अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद स्थित प्रसिद्ध डोल आश्रम में बुधवार को कृष्ण अखंड ज्योति एवं आधारशिला पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ब्रजधाम से लाई गई आधारशिला का आश्रम में स्थापित विश्व के सबसे बड़े अष्टधातु निर्मित श्रीयंत्र के सम्मुख विधि-विधान के साथ पूजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में संतों और आचार्यों की उपस्थिति रही।

डोल आश्रम में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान आश्रम के आचार्यों और पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आधारशिला का विधिवत पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण बना रहा। संतों ने कार्यक्रम को आस्था और संकल्प से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया।

कार्यक्रम में पहुंचे आचार्य कृष्ण प्रेमचंद दास ने कहा कि ब्रजधाम से देवभूमि उत्तराखंड के पावन डोल आश्रम पहुंचना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी आस्था है और आज का यह धार्मिक आयोजन उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण संकल्प से जुड़ा हुआ है।

आचार्य कृष्ण प्रेमचंद दास ने अपने पुराने संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह कृष्ण जन्मभूमि गए थे, तब वहां स्थित गुंबद को देखकर उन्होंने मन में संकल्प लिया था कि जिस दिन उनके आराध्य भगवान कृष्ण अपनी जन्मस्थली पर विराजमान होंगे और गुंबद हट जाएगा, उस दिन वह पुनः दर्शन करने आएंगे।

उन्होंने कहा कि आज आधारशिला पूजन के लिए ब्रजधाम से चलकर उत्तराखंड के डोल आश्रम पहुंचना उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभूति है। उन्होंने इसे भगवान की कृपा बताते हुए कहा कि यह अवसर उनके जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है और अब वह समय निकट आ रहा है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। उन्होंने धार्मिक संकल्प के पूरा होने को लेकर विश्वास व्यक्त किया।

डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने अपने संबोधन में दावा किया कि आगामी छह दिसंबर को संबंधित गुंबद हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा और उस स्थान पर भगवान चित्रगुप्त का पवित्र दरबार स्थापित किया जाएगा। हालांकि, उनके इस दावे की किसी आधिकारिक घोषणा या प्रशासनिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

डोल आश्रम में आयोजित आधारशिला पूजन कार्यक्रम को संतों ने धार्मिक आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संतों, ऋषियों और तपस्वियों की साधना स्थली रही है। ऐसे पवित्र स्थान पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन विशेष महत्व रखता है।

कार्यक्रम के दौरान संतों और आचार्यों ने भगवान कृष्ण एवं भगवान चित्रगुप्त के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में श्रीकृष्ण अखंड ज्योति एवं आधारशिला पूजन को प्रमुख स्थान दिया गया। संतों ने इस अवसर को आस्था और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन बताया।