रामनगर के अपर कोसी में फिर गरजेगा बुलडोजर, 82 मकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार

रामनगर के अपर कोसी में फिर गरजेगा बुलडोजर, 82 मकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार

स्थान : रामनगर
संवाददाता : सलीम अहमद साहिल

रामनगर के अपर कोसी क्षेत्र में एक बार फिर वर्षों पुराने आशियानों पर बुलडोजर चलने की तैयारी तेज हो गई है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं कार्रवाई की आशंका से प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ गई है। वर्षों से जिन घरों में परिवार रह रहे हैं, अब उनके उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है।

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर के मुताबिक, अपर कोसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के पहले चरण में 51 मकानों को ध्वस्त किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में 92 मकानों को लेकर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इन मकानों से संबंधित नोटिस, अपील और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। हालांकि करीब 8 से 9 मकानों पर न्यायालय का स्थगन आदेश होने के कारण उन्हें कार्रवाई से अलग रखा गया है।

डीएफओ पुनीत तोमर ने बताया कि दूसरे चरण में लगभग 82 मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी है। करीब चार हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाना है। विभाग का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जाएगी। न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त मामलों में संबंधित आदेशों का पालन किया जाएगा।

प्रस्तावित ध्वस्तीकरण अभियान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक खाका तैयार किया है। एसपी सिटी हरबंस सिंह के अनुसार, पूरे क्षेत्र को चार सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन और सेक्टर में अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नैनीताल के अलावा चंपावत, ऊधमसिंह नगर और कुमाऊं के अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। इसके साथ ही पीएसी की तैनाती की भी तैयारी की गई है। पुलिस प्रशासन ने संभावित विरोध और अव्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए निरोधात्मक कार्रवाई तथा आवश्यक होने पर गिरफ्तारी की व्यवस्थाएं भी तैयार रखी हैं।

दूसरी ओर, ध्वस्तीकरण की तैयारियों के बीच प्रभावित परिवारों के सामने अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से बनाए गए मकानों के टूटने की आशंका ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उनके घर ध्वस्त कर दिए जाते हैं, तो वे अपने बच्चों और अन्य परिजनों के साथ आखिर कहां जाएंगे।

वन विभाग जहां सरकारी वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई को आवश्यक बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवारों के सामने आवास और पुनर्वास का सवाल खड़ा है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान न्यायालय से राहत प्राप्त परिवारों के आदेशों का पालन करने के साथ ही प्रभावित लोगों की परिस्थितियों को ध्यान में रखने की जरूरत भी सामने आ रही है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं वाले परिवारों के लिए घर छिनने की आशंका चिंता का विषय बनी हुई है।

फिलहाल अपर कोसी क्षेत्र में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को लेकर वन विभाग और पुलिस प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटे हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती और क्षेत्र को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटे जाने से स्पष्ट है कि प्रशासन कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि अपर कोसी में बुलडोजर कब गरजता है और संभावित कार्रवाई से प्रभावित होने वाले परिवारों के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।