
स्थान;- जसपुर
रिपोर्टर :- प्रदीप श्रीवास्तव

उत्तराखंड सरकार द्वारा तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला समेत अन्य खाद्य उत्पादों पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कच्ची शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग उठने लगी है। ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने आजाद समाज पार्टी के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रदीप कुमार जाटव के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

प्रदेश में जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 13 अक्टूबर 2026 से तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा संबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाया है। इसी निर्णय का हवाला देते हुए जसपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने अवैध कच्ची शराब की बिक्री के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की मांग की है। Jagran+1




ग्रामीणों का कहना है कि जसपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में अवैध कच्ची शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि गांवों में इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


आजाद समाज पार्टी के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रदीप कुमार जाटव के नेतृत्व में ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जसपुर उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी राहुल शाह को मांग पत्र सौंपकर क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के उद्देश्य से तंबाकू और निकोटिन युक्त खाद्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है, उसी प्रकार अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए भी प्रभावी अभियान चलाया जाना चाहिए।


प्रदीप कुमार जाटव ने ग्रामीणों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते हुए अवैध शराब की बिक्री पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की गतिविधियों को रोकना बेहद आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित विभागों के माध्यम से नियमित जांच और छापेमारी कराई जाए। साथ ही अवैध शराब के निर्माण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि अवैध कच्ची शराब का कारोबार केवल कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन से भी है। उन्होंने आशंका जताई कि अवैध शराब के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि गांवों में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और अवैध शराब के कारोबार की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।




वहीं, ग्रामीणों की मांग को लेकर जसपुर के उपजिलाधिकारी राहुल शाह ने मीडिया से बातचीत में प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि काशीपुर के आबकारी निरीक्षक को क्षेत्र में लगातार छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कच्ची शराब के निर्माण अथवा बिक्री में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से अवैध शराब की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

जसपुर विधानसभा क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब की बिक्री के खिलाफ उठी इस मांग के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। एक ओर ग्रामीण अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने छापेमारी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में आबकारी विभाग की कार्रवाई से ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री पर कितना प्रभावी अंकुश लग पाता है।

