
स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत नाकोट खोलिया गांव में सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं होने से उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब ग्रामीणों ने अपनी मांग को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा जाता, तब तक वे मतदान नहीं करेंगे।

ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह भंडारी की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत नाकोट खोलिया में ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को हो रही परेशानियों पर चर्चा की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगाए और आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।



ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह भंडारी ने बताया कि दिगालीचौड़-बिंडा तिवाड़ी से नाकोट खोलिया गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर है, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। गांव तक सड़क नहीं पहुंचने से लोगों को पैदल आवागमन करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब किसी ग्रामीण की तबीयत खराब हो जाती है या किसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बीमार व्यक्तियों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में समय पर उपचार उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में उन्हें वर्षों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए अब तक ठोस पहल नहीं हो पाई है।



सड़क नहीं होने का असर गांव के विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि भवन निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री गांव तक पहुंचाना बेहद कठिन और महंगा साबित होता है। परिवहन की सुविधा नहीं होने से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा मिलने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि गांव में विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के प्रति भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद इन जनप्रतिनिधियों ने कभी गांव पहुंचकर उनकी समस्याओं की सुध नहीं ली। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता से विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन गांव की मूलभूत जरूरत सड़क निर्माण को लेकर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।



बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि जब तक नाकोट खोलिया को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा जाता, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति मतदान नहीं करेगा। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि सड़क निर्माण की मांग पूरी होने तक किसी भी राजनीतिक दल के जनप्रतिनिधि को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की कार्रवाई शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि अब वे केवल आश्वासनों के भरोसे नहीं रहेंगे।
बैठक में पूर्व ग्राम प्रधान हेम चंद्र, भुवन चंद्र खोलिया, कैलाश चंद्र, देवी दत्त जोशी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि सीमांत गांव की भौगोलिक परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को देखते हुए सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में बहिष्कार के अपने फैसले पर कायम रहेंगे।

