
स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

सरकारी कार्यालयों में महीनों से लंबित काम, बुजुर्गों की बंद पेंशन, गरीबों के इलाज में आ रही बाधाएं और जरूरतमंद परिवारों को सहायता न मिल पाना—ये ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे कई लोगों को जूझना पड़ता है। ऐसे मामलों में समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया जनसेवा और सूचना के अधिकार के माध्यम से लोगों की आवाज उठाने का प्रयास कर रहे हैं।

हेमंत गौनिया का कहना है कि कई बार लोगों को यह तक पता नहीं होता कि अपनी समस्या के समाधान के लिए वे किस विभाग या अधिकारी के पास जाएं। ऐसे में जरूरतमंदों को सही प्रक्रिया की जानकारी देना और उनकी शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने में मदद करना महत्वपूर्ण है।




उनके अनुसार, जनसेवा का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की शिकायत सुनना नहीं, बल्कि उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी है। इसके लिए सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया जाता है, जिसके जरिए सरकारी कार्यों और अभिलेखों से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

हेमंत गौनिया का कहना है कि पहाड़ों, गांवों, शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन की जरूरत होती है। सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने, फाइलें लंबित रहने और कार्यालयों में सुनवाई न होने जैसी शिकायतों में लोगों को सही प्रक्रिया समझाने का प्रयास किया जाता है।



उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी का सरकारी काम लंबे समय से अटका हुआ है या किसी जरूरतमंद को सहायता मिलने में परेशानी हो रही है, तो वह अपनी समस्या के समाधान के लिए उचित विभागीय प्रक्रिया अपनाए और जरूरत पड़ने पर सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करे।
हेमंत गौनिया के मुताबिक, समाज में जागरूकता और आपसी सहयोग से लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाया जा सकता है। उनका संदेश है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी समस्या के कारण अकेला महसूस नहीं करना चाहिए और उसे समाधान के लिए उपलब्ध कानूनी एवं प्रशासनिक विकल्पों की जानकारी लेनी चाहिए।



उन्होंने आमजन से इस संदेश को अधिक से अधिक साझा करने की अपील भी की, ताकि जरूरतमंद लोगों तक जनसेवा और आरटीआई से जुड़ी जानकारी पहुंच सके। उनका उद्देश्य है कि उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अपने अधिकारों और शिकायत निवारण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सके।

