
स्थान- देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में खनन से प्राप्त राजस्व में हुई बढ़ोतरी को पारदर्शी व्यवस्था और खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि सरकार ने अवैध खनन और राजस्व चोरी पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की पारदर्शिता का एक प्रमुख पैमाना सरकारी राजस्व में होने वाली बढ़ोतरी भी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी आय लगातार बढ़ रही है तो यह व्यवस्था में सुधार और राजस्व लीकेज कम होने का संकेत है।


धामी ने कहा कि कुछ वर्ष पहले प्रदेश को खनन से करीब 300 से 350 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व प्राप्त होता था, जो अब 1200 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुका है। उत्तराखंड के भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग ने 1,217 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।

मुख्यमंत्री ने इस बढ़ोतरी के पीछे अवैध खनन, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी के खिलाफ की गई कार्रवाई को प्रमुख कारण बताया। राज्य सरकार के अनुसार ई-नीलामी, सैटेलाइट आधारित निगरानी और माइनिंग सर्विलांस सिस्टम सहित कई तकनीकी उपाय भी लागू किए गए हैं।



राज्य सरकार का कहना है कि खनन लॉट के आवंटन की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। सरकार के अनुसार इन्हीं सुधारों के चलते खनन राजस्व पूर्व के लगभग 300 करोड़ रुपये के स्तर से बढ़कर 1200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा है।
खनन क्षेत्र में सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड को 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता स्वीकृत की है। यह राशि ‘पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना’ के तहत माइनर मिनरल्स और स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स से जुड़े सुधारों के लिए दी गई है।




मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में लागू खनन व्यवस्था का दूसरे राज्यों के अधिकारी भी अध्ययन कर रहे हैं। राज्य सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड के खनन मॉडल का अध्ययन किए जाने का उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में खनन क्षेत्र से राजस्व में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि उसका लक्ष्य वैध खनन को बढ़ावा देने के साथ पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और पर्यावरणीय मानकों को मजबूत करना है।

