काठगोदाम से कैंची धाम तक रोपवे कनेक्टिविटी की तैयारी, 2800 करोड़ की

काठगोदाम से कैंची धाम तक रोपवे कनेक्टिविटी की तैयारी, 2800 करोड़ की

रिपोर्टर : संजय जोशी
लोकेशन :
हल्द्वानी

काठगोदाम से हनुमानगढ़ी और कैंची धाम तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को गति देने के लिए बुधवार को सर्किट हाउस काठगोदाम में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना की तकनीकी, यातायात और भूमि संबंधी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। कैंची धाम तक करीब 21 किलोमीटर लंबे रोपवे नेटवर्क की डीपीआर तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ पर्वतीय सड़कों पर यातायात का दबाव कम करना है।

परियोजना के तहत काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुट ओवरब्रिज बनाने का भी प्रस्ताव है, ताकि रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री आसानी से रोपवे स्टेशन तक पहुंच सकें। इसके साथ काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों में वाहन पार्किंग की सुविधाएं विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।

एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बैठक में बताया कि काठगोदाम-नैनीताल रोपवे परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2800 करोड़ रुपये है। प्रस्तावित 14.9 किलोमीटर लंबे मार्ग पर काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी स्टेशन बनाए जाएंगे तथा करीब 58 टावर लगाए जाने का प्रस्ताव है।

अधिकारियों के अनुसार रोपवे के माध्यम से प्रति घंटे करीब 1800 यात्रियों के आवागमन की क्षमता प्रस्तावित है। रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक यात्रा करीब 20 से 25 मिनट में पूरी होने का अनुमान है, जबकि इस खंड के लिए एकतरफा किराया 375 रुपये प्रति यात्री प्रस्तावित किया गया है। अंतिम स्वरूप विस्तृत तकनीकी अध्ययन और स्वीकृतियों के बाद तय होगा।

प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हनुमानगढ़ी रोपवे स्टेशन के आसपास अतिरिक्त यातायात दबाव न बढ़े, इसके लिए पहले से समुचित ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए। रानीबाग क्षेत्र में करीब 33 एकड़ उपलब्ध भूमि पर स्टेशन के साथ पार्किंग विकसित करने और ज्योलीकोट स्टेशन को जंक्शन के रूप में विकसित कर वहां से कैंची धाम के लिए रोपवे जोड़ने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में कहा गया कि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है, इसलिए तकनीकी अध्ययन पूर्ण होने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। संबंधित विभागों को वन भूमि हस्तांतरण सहित आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने और एनएचएलएमएल के साथ समन्वय बनाकर कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों का मानना है कि रोपवे परियोजना से नैनीताल और कैंची धाम जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिलने के साथ ट्रैफिक और पार्किंग के दबाव में कमी आ सकती है। इससे हल्द्वानी, काठगोदाम और रानीबाग के होटल, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है। बैठक में सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।