सरकारी जमीनों को लेकर कांग्रेस का धामी सरकार पर हमला

सरकारी जमीनों को लेकर कांग्रेस का धामी सरकार पर हमला

स्थान : रुद्रपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

सिटी क्लब में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा ने प्रेस वार्ता कर उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के आवंटन और लीज को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बेशकीमती सरकारी जमीनों को निजी हाथों में दिए जाने से राज्य के हित प्रभावित हो रहे हैं।

हिमांशु गाबा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कई जमीनों को लेकर निर्णय पारदर्शी तरीके से नहीं लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य हैं और पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों को कम कीमत पर निजी हितों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। गाबा ने इसे उत्तराखंड की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ बताते हुए सरकार से सभी भूमि आवंटन और लीज से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

प्रेस वार्ता में मौजूद पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि को निजी परियोजनाओं और पीपीपी मॉडल के तहत देने की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसका कांग्रेस विरोध करेगी।

ठुकराल ने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से उत्तराखंड की बेशकीमती जमीन पर निजी संस्थाओं का नियंत्रण बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस भूमि को किस संस्था या परियोजना के लिए और किन शर्तों पर उपलब्ध कराया गया है।

हालांकि सरकारी जमीन को लेकर कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय आरोपों को उत्तराखंड सरकार पहले ही खारिज कर चुकी है। सरकार का कहना है कि निजी निवेशकों को करीब 7,000 बीघा जमीन देने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के पास लगभग 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध है।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UIIDB का उद्देश्य सरकारी जमीन बेचना नहीं, बल्कि अनुपयोगी भूमि का आर्थिक उपयोग कर निवेश, रोजगार और राजस्व बढ़ाना है।

वहीं कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जमीन से जुड़े निर्णयों को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर ऐसे फैसलों की समीक्षा की जाएगी और जिन प्रक्रियाओं को पार्टी राज्यहित के खिलाफ मानती है, उन्हें निरस्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।