जागड़ा पर्व पर 40 साल बाद चालदा महासू महाराज का शाही स्नान

जागड़ा पर्व पर 40 साल बाद चालदा महासू महाराज का शाही स्नान

स्थान : चकराता (देहरादून)
ब्यूरो रिपोर्ट

आस्था, लोक-संस्कृति और देव परंपरा के प्रसिद्ध जागड़ा पर्व पर सोमवार को पूरा जौनसार-बावर क्षेत्र ‘बोठा महासू’ और ‘चालदा महाराज’ के जयकारों से गूंज उठा। खत कोरू के कचटा गांव में करीब 40 साल बाद आराध्य चालदा महासू महाराज का ऐतिहासिक शाही स्नान कराया गया।

सुबह से ही कचटा गांव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। ढोल-दमाऊ की थाप, देव धूप की सुगंध और जयकारों के बीच जैसे ही चालदा महासू महाराज की देव पालकी गर्भगृह से बाहर निकली, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालुओं ने देव पालकी के दर्शन कर चावल, अखरोट और पुष्प अर्पित किए। इस दौरान लोगों ने अपने परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। देव पालकी के साथ श्रद्धालुओं का विशाल जत्था भी आगे बढ़ता रहा।

मई 2026 से कचटा गांव में विराजमान चालदा महासू महाराज का इस बार का जागड़ा पर्व विशेष रहा। करीब चार दशक के इंतजार के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को अपने आराध्य को पवित्र यमुना नदी में शाही स्नान कराने का अवसर मिला।

टिकरधार जातरा के बाद देव पालकी यमुना तट पहुंची। इसी दौरान खत बहलाड़ के विसोई क्षेत्र से चालदा महाराज की एक अन्य देव डोली भी यमुना तट पहुंची। दोनों देव पालकियों के एक साथ पहुंचने पर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर दिखाई दिया।

यमुना के पवित्र जल में विधि-विधान से शाही स्नान कराया गया। इसके बाद पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कचटा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल और टंगराण परिवार की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

जागड़ा पर्व के दौरान जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति, देव परंपरा और धार्मिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।

शाही स्नान और पूजा-अर्चना के बाद देव पालकियों को पुनः मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। दिनभर जयकारों, लोक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच चले इस ऐतिहासिक देव उत्सव का श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ।