
स्थान : हल्द्वानी ( बनभूलपुरा )
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना


बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले को लेकर बुधवार, 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर अहम सुनवाई होनी है। सुनवाई को देखते हुए हल्द्वानी पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बनभूलपुरा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले पुलिस ने क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की अपील की है।




मामला हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास बनभूलपुरा, गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती और इंदिरा नगर समेत आसपास के क्षेत्रों की भूमि से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2026 के आदेश में उल्लेख किया गया था कि करीब 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला है, जहां लगभग 4,365 मकान और 50 हजार से अधिक लोगों के रहने की बात सामने आई थी।



रेलवे और केंद्र सरकार की ओर से न्यायालय में दाखिल अनुपालन हलफनामे में कहा गया था कि हल्द्वानी परियोजना के तहत रेलवे लाइन के पुनर्संरेखण और विकास कार्यों के लिए करीब 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। वहीं प्रभावित पक्षों की ओर से रेलवे के स्वामित्व, बेदखली की प्रक्रिया और पुनर्वास समेत विभिन्न मुद्दों पर आपत्तियां उठाई गई हैं।


यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों की पहचान करने के साथ उनके पुनर्वास को लेकर योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुनर्वास और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता से जुड़े पहलुओं पर भी न्यायालय में विचार किया गया।

फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रभावित परिवारों के लिए शिविर आयोजित कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कराने में सहायता देने के निर्देश भी दिए थे। न्यायालय ने साफ किया था कि पात्र परिवारों की पहचान सरकारी आवास योजनाओं के नियमों के अनुसार की जाए।



अब 9 सितंबर की सुनवाई पर स्थानीय लोगों के साथ रेलवे, राज्य सरकार और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ड्रोन और अन्य सुरक्षा संसाधनों से भी निगरानी की जा रही है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल सुप्रीम कोर्ट से आने वाले आदेश को लेकर है। आज की सुनवाई में रेलवे परियोजना के लिए भूमि खाली कराने की प्रक्रिया, प्रभावित परिवारों की स्थिति और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।

