
स्थान : चमोली
रिपोर्टर : विनोद पांडे


पिंडर घाटी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कथित तौर पर चुनावी सर्वे के नाम पर लोगों से व्यक्तिगत जानकारी जुटाए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कामाख्या ट्रस्ट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े होने का दावा करने वाले कुछ लोग अलग-अलग टीम बनाकर गांवों में घर-घर जाकर ग्रामीणों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं।


आरोप है कि टीम के सदस्य खुद को आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े सर्वे या एग्जिट पोल का हिस्सा बताते हुए ग्रामीणों से वर्तमान विधायक के कामकाज, पसंदीदा राजनीतिक दल और चुनावी पसंद से संबंधित सवाल पूछ रहे हैं। इसके साथ ही फोन नंबर और आधार से जुड़ी जानकारी भी मांगे जाने की बात सामने आई है।



इसी क्रम में ऐसी ही एक टीम देवराडा गांव में स्थानीय संवाददाता विनोद पांडे के घर भी पहुंची। संवाददाता ने जब टीम से उनके सर्वे के उद्देश्य और संस्था के बारे में जानकारी मांगी तो कथित सर्वे कर्मियों से उनकी पहचान और अधिकृत दस्तावेज दिखाने को कहा गया।



संवाददाता के अनुसार टीम के सदस्यों से कैमरे के सामने अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद क्षेत्र में मौजूद पूरी टीम को प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास एकत्र होने के लिए कहा गया, लेकिन वहां केवल तीन लोग ही पहुंचे।


बताया गया कि संवाददाता ने उनसे सर्वे कराने संबंधी अथॉरिटी लेटर दिखाने को कहा। इस पर टीम की ओर से मोबाइल फोन में पीडीएफ के रूप में एक दस्तावेज दिखाया गया। हालांकि दस्तावेज की प्रामाणिकता और संबंधित संस्था की अधिकृत भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
संवाददाता का कहना है कि जब टीम के सदस्यों से संस्था, सर्वे और लोगों से मांगी जा रही व्यक्तिगत जानकारियों को लेकर और सवाल किए गए तो वे वहां से चले गए। इस व्यवहार के बाद ग्रामीणों और संवाददाता के मन में पूरे सर्वे को लेकर संदेह और बढ़ गया।



मामले की जानकारी थाना थराली को भी दी गई। संवाददाता के अनुसार पुलिस की ओर से बताया गया कि इस तरह के किसी सर्वे या टीम के क्षेत्र में काम करने के संबंध में उन्हें पूर्व जानकारी नहीं है। अब यह जांच का विषय है कि संबंधित टीम किस संस्था के निर्देश पर और किस अनुमति से ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी एकत्र कर रही थी।

मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आधार संख्या, मोबाइल नंबर या अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति अथवा अपुष्ट संस्था के साथ साझा करने से पहले उसकी पहचान और अधिकृत दस्तावेजों की पुष्टि करना बेहद जरूरी माना जाता है।
फिलहाल संबंधित संस्था या टीम की ओर से आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अब ग्रामीणों की नजर पुलिस, प्रशासन और खुफिया विभाग पर है कि वे मामले का संज्ञान लेकर सर्वे की वैधता, टीम की पहचान और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र किए जाने के उद्देश्य की जांच करते हैं या नहीं।

